त्रिपुरा में भाजपा ने लेफ्ट का किला ध्वस्त कर दिया। भाजपा और आईपीएफटी गठबंधन ने 25 साल से सत्ता पर काबिज लेफ्ट फ्रंट को उखाड़ फेंका। इसमें बड़ी भूमिका रही मुंबई में जन्मे सुनील देवधर व उनकी टीम की। महाराष्ट्र में जन्मे देवधर हैं तो मराठी लेकिन फर्राटेदार बंगाली के साथ साथ कई और भाषाओं पर भी पकड़ रखते हैं। मेघालय में जब खासी और गारो जनजाति के लोगों से मिलते हैं तो उनसे उन्हीं की भाषा में बात करते हैं। देवधर 12 सालों तक संघ के लिए प्रचारक भी भूमिका भी निभा चुके हैं।

देवधर ने साल 2005 में माइ होम इंडिया नाम से एक एनजीओ की स्थापना की। त्रिपुरा में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के लिए देवधर ने अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी का काम किया और करीब 3 सालों में Mumbai  से आए इस स्टार ने किया लेफ्ट का किला ध्वस्तग्राउंड वर्क कर माणिक सरकार के चक्रव्यूह को तोड़कर रख दिया। भाजपा की त्रिपुरा टीम में मुंबई के ही शिवानंद नाडकर्णी, श्रवण झा व उनकी पत्नी पराग नेरूकर, अजित माली, मुकेश झा, संतलाल यादव, विनय पांडेय, सुकेश झा, ब्रम्हदेव आतकारी व दिल्ली के कपिल शर्मा की अहम भूमिका माना जा रही है।

इनके जमीनी प्रयासों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के शीलभूषण शर्मा, केरल से प्रमोद और अनिलन की मदद मिली और 25 सालों से एकछत्र राज कर रही लेफ्ट की सरकार को उखाड़ फेंका। जीत की रणनीति में इस टीम ने स्थानीय मसलों को जोर शोर से उठाया। बड़ी मेहनत से सभी 60 सीटों पर बूथ कमेटी बनाई और करीब 30 हजार युवाओं को चुनाव प्रचार में लगाया।

खास बात यह है कि लोगों की समस्याओं को चुनावी भाषणों में स्थान दिया। राजनीतिक जमीन पुख्ता करने के लिए चुनावों से ठीक पहले दूसरे दलों के कई नेताओं और विधायकों को भाजपा में शामिल कराया। इसके अलावा, स्थानीय बोली और भाषा को बढ़ावा दिया और बहादुरी के साथ ड्रग्स के धंधे को बेनकाब किया। विकास और रोजगार देने का वादा किया जबकि यहां के लोग 70 फीसदी खेती पर निर्भर है।