त्रिपुरा विधानसभा में जिस तरह से भगवा आंधी चली, उसमें लेफ्ट का सबसे मजबूत किला चरमरा कर ढह गया। इस चुनाव में बीजेपी अकेले बहुमत हासिल किया। उसे कुल 35 सीटें मिली हैं। हालांकि बीजेपी ने यहां आईपीएफटी के साथ गठबंधन किया था, ऐसे में इस गठबंधन ने कुल 43 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। सीपीएम 16 पर सिमट गई तो वहीं कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। खास बात यह है कि पिछले चुनाव में महज 1.5 फीसदी वोट हासिल करने वाली बीजेपी ने इस बार रिकॉर्ड 41 फीसदी वोट का इजाफा कर करीब 43 फीसदी वोट बैंक किया।


खास बात यह है कि इस चुनाव में बीजेपी ने 51 सीटों पर चुनाव लड़ा था, वहीं 9 सीटों उसने आईपीएफटी को दी थी। बीजेपी ने 51 पर चुनाव लड़कर 35 सीटें अपने नाम की। ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ती तो सीपीएम का इससे भी बुरा हाल हो जाता। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट का वोट शेयर 59 फीसदी था, जबकि इस विधानसभा चुनाव में वह 16 फीसदी घटकर महज 43 पर आ गया। इन सबसे बीच कांग्रेस का सबसे बुरा हाल रहा। पिछले विधानसभा चुनाव में 36.53 वोट शेयर हासिल करने वाली कांग्रेस सिमटकर 1.8 प्रतिशत पर आ चुकी है।

200 सांसदों ने डाला था त्रिपुरा में डेरा
बता दें कि त्रिपुरा में 50 प्रतिशत उम्मीदवारों ने पिछले पांच साल में भाजपा की सदस्यता हासिल की है। भाजपा के 52 केंद्रीय मंत्रियों और 200 से ज्यादा सांसदों और नेताओं ने राज्य में चुनावी रैलिया की। पीएम मोदी ने राज्य में चार चुनावी रैलियां की। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 6 रातें यहां गुजारीं। त्रिपुरा में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 7 सभा की और चार रोड शो किए। उनमें से सात जगहों पर पार्टी को जीत मिली।

भाजपा को इन 3 राज्यों में पिछले चुनाव से 61 फीसदी ज्यादा वोट मिले
बता दें कि 2013 में जब त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में विधानसभा चुनाव हुए तो उस वक्त भाजपा को 4.5 प्रतिशत वोट और एक सीट पर जीत मिली थी। हालांकि इस बार तीनों राज्यो में भाजपा ने 61 प्रतिशत वोट प्रतिशत को बढ़ाकर 66 फीसदी कर लिया है और उसके विधायकों की संख्या 49 हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में 74 सीटों पर भाजपा लड़ी थी। 70 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी। 43 प्रतिशत वोट त्रिपुरा में भाजपा को मिले थे। एक राज्य में 41 फीसदी वोट का इजाफा करने वाली पहली पार्टी बनी। 1.8 प्रतिशत रह गया त्रिपुरा में कांग्रेस का वोट बैंक। 36.53 से 1.8 प्रतिशत पर सिमट गई। पिछली बार दस सीट मिली थी। इस बार नहीं खुला खाता।