असम में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी अपनी शक्ति को दिखाते हुए गुवाहाटी से 70 किलोमीटर दूर नलबाडी शहर में शुक्रवार को 'शांति रैली' आयोजित की। राज्य के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता (संशोधन) कानून के विरोध में निरंतर प्रदर्शन जारी हैं जिसमें हजारों छात्र, वकील और आम लोग प्रदर्शन में शामिल हुए।


नलबाड़ी में ''शांति रैली' के साथ-साथ शहर में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने 'बजरानीदान' विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम शुरू किया जबकि शहर में वकीलों के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों ने भी सीएए के खिलाफ विरोध रैली निकाली गयी।


मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनावाल, राज्य के वित्त मंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा शर्मा और भाजपा के शीर्ष नेताओं ने पीस रैली में उपस्थित रहे, पूरे शहर को एक सुरक्षा किले में तब्दील कर दिया गया। अवर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), कानून एवं व्यवस्था खुद कल रात नलबाडी पहुंचे और सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। भाजपा रैली के साथ-साथ आसू और उनके समर्थकों ने एक विरोध कार्यक्रम आयोजित किया।


शहर के वकीलों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और सीएए के खिलाफ अपना विरोध दर्ज किया। डिब्रूगढ़ सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में वकीलों ने इसी तरह का विरोध प्रदर्शन जुलूस निकाले। वकीलों ने उपायुक्त को सीएए के विरोध में एक ज्ञापन सौंपा। गुवाहाटी में ऑल असम लॉयर्स एसोसिएशन ने सीएए के खिलाफ 'राजभवन चलो' रैली निकाली और राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा।


नौगांव सहित राज्य में अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन हुआ जहां बड़ी संख्या में छात्र विरोध में शामिल हुए। असम के विभिन्न हिस्सों में इस कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन जारी है। दरअसल नए नागरिकता कानून में 31 दिसंबर 2014 से पहले बंगलादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से बिना किसी वैध दस्तावेज के आए हिन्दुओं, पारसी, जैन, बौद्ध और ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।


पूर्वोत्तर राज्यों खासकर असम और त्रिपुरा के लोग इस कानून को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इस बात का डर है कि इससे पड़ोसी देश बंगलादेश से आए गैर मुस्लिम लोगों की संख्या काफी बढ़ जाएगी।