देश के पूर्वोत्तर के नौ राज्यों में हिंदुओं की आबादी घटने का हवाला देते हुए देश में धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग उठी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया है कि पिछले 20 वर्ष में 5 करोड़ हिंदुओं का धर्मांतरण हो गया, लेकिन आज तक धर्मांतरण विरोधी कानून का एक ड्राफ्ट भी नहीं बनाया गया। धर्मांतरण जैसी राष्ट्रीय समस्या के लिए कानून बनना चाहिए।

भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि आज तक 125 बार संविधान बदला गया और वोटबैंक राजनीति के कारण 5 बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा गया, लेकिन मूल संविधान शत प्रतिशत लागू नहीं किया गया। 20 प्रतिशत संविधान आज भी लंबित है। समान शिक्षा, समान चिकित्सा और समान नागरिक संहिता हमारे संविधान की आत्मा है। घुसपैठ नियंत्रण, धर्मांतरण नियंत्रण और जनसंख्या नियंत्रण का प्रावधान हमारे संविधान में है लेकिन तुष्टीकरण की राजनीति के कारण आज तक कानून नहीं बनाया गया।

उन्होंने समान सिलेबस की मांग उठाते हुए कहा कि जब आईएएस, आईपीएस, बैंक, रेलवे आदि परीक्षाओं का एक सिलेबस होता है तो फिर सीबीएसई, यूपी, बिहार और बंगाल बोर्ड आदि का अलग-अलग सिलेबस क्यों होता है। इससे सभी बच्चों को एक समान पढ़ाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए सरकार को 12वीं तक ‘एक देश एक शिक्षा बोर्ड’ और ‘एक देश एक सिलेबस’ लागू करना चाहिए। उपाध्याय ने समान नागरिक संहिता को लेकर कहा कि गोवा में यह कानून लागू है और सब खुश हैं फिर पूरे देश में लागू करने में क्या समस्या है? 2019 से लंबित याचिका पर आज तक सरकार ने जबाब दाखिल नहीं किया है।

उपाध्याय ने कहा कि 5 करोड़ से अधिक घुसपैठिये भारत में रहते हैं जो बहुत तेजी से जनसंख्या विस्फोट कर रहे हैं। ये हमारे हिस्से का रोटी कपड़ा और मकान ले रहे हैं और चोरी लूट झपटमारी भी कर रहे हैं। घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिए भी कानून बनाने की जरूरत है। इस मौके पर सरदार प्रीत सिंह भी मौजूद रहे।