प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान असम की जनता से वादा करने के साथ ही 16 मई की तिथि तय कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद 16 मई से घुसपैठियों को अपने-अपने टोपले बांध कर असम से जाना होगा।

दुर्भाग्य की बात यह है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का कार्यकाल अगले वर्ष खत्म होने जा रहा है, लेकिन अभी तक उन्होंने अपने वादे को पूरा नहीं किया। मोदी ने असम की जनता के साथ वादाखिलाफी करने के साथ ही झूठ बोलकर प्रधानमंत्री की गरिमा को भी ठेस पंहुचायी।

असम प्रदेश कांग्रेस समिति के सांगठनिक महासचिव रंजन बोरा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि भाजपा को किसी पार्टी पर आरोप लगाने से पहले उन्हें अपने अंदर झांकना चाहिए कि उनके नेतृत्व ने किस कदर देश तथा प्रदेश की जनता को ठगने का काम किया है।

बोरा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा ने लोस चुनाव से पहले घुसपैठिए की समस्या को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन उन्होंने जिस तरह उसे लोगों के बीच उठाया आज वहीं गले की फांस बन गया है। प्रधानमंत्री ने अपने पद की गरीमा का ख्याल नहीं रखा और प्रदेश के लोगों के साथ झूठ बोलते गए।

बोरा ने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पहले जाति नायक थे, फिर आंचलिकतावादी बने और रातो-रात राष्ट्रवादी नेता के रुप में अवतार लिए। एक व्यक्ति के इस तरह के अवतारी चरित्र से असम की जनता बेहद नाराज है। उनके कार्यकाल में असमिया जाति को बरबादी की कगार पर धकेला जा रहा है, लेकिन जाति नायक मूक दर्शक बने हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि वित्तमंत्री हिमंत जैसे भ्रष्ट नेता व सिंडिकेट का बादशाह पीयूष हजारिका को लेकर भ्रष्टाचार से कैसे लड़ेंगे जो खुद सर से पांव तक आरोपों में घिरे हुए हैं। बोरा ने भाजपा व अगप की मित्रता पर भी कटाक्ष किया।