अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अभी से कमर कस ली है। शनिवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के महासचिवों और पार्टी के विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों के साथ संगठन और वर्ष 2022 में होने वाले पांच राज्यों के चुनाव पर व्यापक मंथन किया। जेपी नड्डा के घर पर सुबह 11 से शाम साढ़े पांच बजे तक चले बैठकों के दौर में पार्टी के सभी महासचिव मौजूद रहे।

बैठक में पार्टी के पांचों मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी हिस्सा लिया और मोर्चों के कामकाज की जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में कोरोना काल में देश भर में चलाए जा रहे विशेष अभियान 'सेवा ही संगठन' कार्यों के फीडबैक पर चर्चा हुई। साथ ही हालिया संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का बीजेपी शासित प्रदेशों के अलावा अन्य राज्यों में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के गरीब कल्याण योजनाओं को, और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को ग्राउंड जीरो तक संगठनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच ले जाने की रणनीति पर चर्चा हुई।

नड्डा ने कहा कि बीजेपी कोरोना वायरस की दूसरी लहर की शुरुआत से ही 'सेवा ही संगठन' के जरिए देशभर में राहत और सहायता कार्य में जुट गई थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वो भविष्य में कोरोना जैसे संकट के समय तैयार रहें। अगले साल की शुरुआत में बीजेपी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब के चुनाव में जाना है। इसके बाद भी कुछ राज्यों के चुनाव होने हैं जिनमें गुजरात भी शामिल है। साथ ही बैठक में संगठनात्मक कार्यक्रमों को भी तेज करने के लिए लंबी चर्चा हुई।

बैठक के बाद जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बी. एल संतोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सूत्रों की मानें तों दोनों नेताओं द्वारा पार्टी संगठन की तरफ से प्रधानमंत्री को फीडबैक दिया गया और आगामी चुनावों लेकर भी पार्टी प्रोग्राम और तैयारियों को लेकर मंथन हुआ। जेपी नड्डा के घर पर रविवार को भी सभी राज्यों के प्रभारियों के साथ चर्चा होगी। सूत्रों की माने तो 'सेवा ही संगठन' के कार्यों के जरिए बीजेपी अगले साल होने विधानसभा चुनावों के लिए अपनी जमीन मजबूत करने के लिए कदम दर कदम रणनीति बना रही है। बीजेपी का नेतृत्व इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि कोरोना की दूसरी लहर में मोदी सरकार और बीजेपी शासित राज्यों में विपक्ष ने उनकी ईमेज को नुकसान पहुंचाया है।