अब CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों के होश उड़ने वाले हैं क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार नया कानून लेकर आ रही है। असम में 28 सीटें पर मुस्लिम काबिज हैं इसी को लेकर राज्य की भाजपा सरकार ने ऐसा रास्ता निकाला है कि नागरिकता कानून का विरोध करने वालों के होश उड़ने वाले हैं। नागरिकता कानून के विरोधियों से टक्कर लेने के लिए केंद्र सरकार प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन का इस्तेमाल करने जा रही है।

असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने इस बात के संकेत भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन करने का मकसद सिर्फ मूल असमियों के अधिकारों की रक्षा करना है। सरमा ने बताया कि सीटों का परिसीमन ऐसे किया जाएगा कि प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में मूल असमी मतदाता बहुसंख्यक रहें। प्रदेश सरकार की यह पहल असम के मूल निवासियों की इस आशंका को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कि एनआरसी लागू होने के बाद वे अपने ही प्रदेश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे। सरमा ने कहा कि प्रदेश की 126 विधानसभा सीटों में से कम से कम 110 सीटें मूल असमियों के लिए रखी जानी चाहिए।

सरमा ने कहा कि सीटों की संख्या बढ़ाने की हमारी कोई इच्छा नहीं है क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं है। बता दें कि प्रदेश में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 37 फीसदी है। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में 28 मुस्लिम उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की थी। इनमें से 14 कांग्रेस, 13 एआईयूडीएफ और एक बीजेपी का उम्मीदवार शामिल था। वहीं प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों में से 6 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का अच्छा-खासा प्रभाव है।

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