नौसेना के अधिकारी नरोत्तम देउरी चार साल पहले ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। समाचार पत्र दे टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक उनका भाई सरकारी नौकरी के लिए दर दर की ठोकरें खा रहा है लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही।

देश के लिए शहीद होने वाले नरोत्तम देउरी के भाई डेल्टन ने शनिवार को असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से सरकारी नौकरी के लिए अपील की। इससे पहले नौसेना डेल्टन(21) के अनुरोध को ठुकरा चुकी है।

डेल्टन दिव्यांग(शारीरिक रुप से अक्षम)है। नरोत्तम देउरी लखीमपुर जिले के नारायणपुर मेजर चापोरी गांव के रहने वाले थे। यह गांव जिला मुख्यालय लखीमपुर से 40 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 15 पर स्थित है।

14 अगस्त 2013 को नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक में आग लग गई थी, जिसके बाद विस्फोट हुआ था। उस वक्त नरोत्तम 21 साल के थे। विस्फोट के बाद सिंधुरक्षक पनडुब्बी मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में डूब गई थी। उस वक्त पनडुब्बी पर 18 क्र मेंबर्स थे। हादसे में नरोत्तम देउरी शहीद हो गए थे। बकौल डेल्टन, मेरा भाई सिर्फ नौैसेना की ही नहीं देश की सेवा कर रहा था।

सरकार को हमारे परिवार की मदद करनी चाहिए लेकिन कई बार अपील के बावजूद सरकार ने कुछ नहीं किया। राज्य की मौजूदा सरकार को न तो मेरे भविष्य की चिंता है और न ही मेरे परिवार की। मैं मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से मामले को देखने का अनुरोध करता हूं। मेरे पिता ज्योतिष चंद्र देउरी मेरी नौकरी के लिए दो बार आवेदन कर चुके हैं लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

डेल्टन ने समाचार पत्र द टेलीग्राफ को बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय कई मंत्री हमारे घर आए थे और मदद का आश्वासन दिया था लेकिन मौजूदा सरकार को हमारे भविष्य की कोई परवाह नहीं है। जब मैंने बिहपुरिया के विधायक देबनंदा हजारिका से नौकरी के लिए संपर्क किया तो उन्होंने मुझसे कहा कि राज्य सरकार कुछ नहीं कर सकती।

केन्द्र सरकार को इस मामले को देखना चाहिए। डेल्टन ने आरोप लगाया कि मेरे गांव के नजदीक देउरो स्वायत्त परिषद की ओर से नरोत्तम के लिए जो मेमोरियल ग्राउंड बनाया गया था वह बुरी तरह से उपेक्षा का शिकार है।