भाजपा ने 15 सालों से लगातार साझाीदार बने रहे नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) से नाता तोड़ कर पूर्व मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो की नई बनी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के साथ हाथ मिला लिया है। इस समझौते के तहत पार्टी राज्य की 60 में से 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दूसरी ओर, प्रदेश भाजपा नेताओं ने दिल्ली में हुए इस चुनाव-पूर्व समझौते को खारिज कर दिया है।


प्रदेश के तमाम नेताओं ने इस नई साझीदारी का विरोध करते हुए पार्टी प्रमुख अमित शाह को एक पत्र भेजा है। उस पर प्रदेश अध्यक्ष विसासोली हांगू और महासचिव एडुजो थेलुओ समेत कई नेताओं के हस्ताक्षर हैं। पार्टी ने 20 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है उसमें हांगू का नाम नहीं है। पत्र में कहा गया है कि उक्त समझौते का जमीन स्तर पर कोई मतलब नहीं है। नेताओं ने 60 में से 40 सीटें एनडीपीपी को देने के फैसले की भी आलोचना की है। उनकी दलील है कि तालमेल की पहल एनडीपीपी ने की थी। ऐसे में उसे दो-तिहाई सीटें देने का क्या मतलब है?


भाजपा और एनडीपीपी गठजोड़ ने नागालैंड चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने का दावा किया है। उधर, सत्तारुढ़ एनपीएफ ने भाजपा पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि उसके साथ सीटों पर तालमेल की बातचीत चल रही थी। लेकिन उसने अचानक एनडीपीपी से हाथ मिला लिया। एनपीएफ अध्यक्ष डा. सुरहोजेली लेजित्सु ने कहा कि अब भाजपा के साथ तालमेल के दरवाजे बंद हो गए हैं। पार्टी अपने बूते सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ध्यान रहे कि भाजपा यहां एनपीएफ की अगुवाई वाली सरकार में साझीदार थी।