त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करने वाली सीपीएम के लिए जोलाईबारी सीट को भी बचाना मुश्किल हो गया। इस सीट पर 6 बार सीपीएम के उम्मीदवार जीते थे, लेकिन इस बार वह इस सीट को भी नहीं बचा पाई है।  भाजपा के उम्मीदवार अंकिया मोग चौधरी ने माकपा के जसवीर त्रिपुरा को 1568 मतों से हराया और इस सीट पर भगवा लहरा दिया है। इस सीट पर कांग्रेस ने बिज्रमोहन त्रिपुरा को मैदान में उतारा था। त्रिणमूल कांग्रेस की तरफ  से मधुसुदन त्रिपुरा और एक निर्दलीय उम्मीदवार कल्याण रियांग भी अपनी किस्मत आजमा रहे थे।



सीपीएम के जसबीर ने लगाईथी जीत ही हैट्रिक

गौरतलब है कि इस विधानसभा सीट पर 2003 से 2013 तक सीपीएम के उम्मीदवार जसबीर त्रिपुरा ही जीतते आए थे। 2003 के विधानसभा चुनाव में जसबीर का मुकाबला आईएनपीटी के मेवर कुमार जमातिया से था। इस चुनाव को जसबीर ने 4504 मतों से जीता। मेवर के खाते में 6820 तो जसबीर को 11324 वोट मिले। इसके बाद जसबीर ने अगले दोनों चुनावों को अपने नाम किया। 2008 में उनका मुकाबला कांग्रेस के बिजेंद्र मोग चौधरी से था। इस चुनाव में जसबीर को कुल 13864 तो बिजेंद्र को 8356 वोट मिले। उन्होंने यह चुनाव 5508 वोटों से जीता था। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में जसबीर ने एक बार फिर कांग्रेसी उम्मीदवार बिजेंद्र मोग को धूल चटाई। उन्होंने ये चुनाव 9343 वोटों से जीता। इस बार जसबीर को 24295 तो चौधरी को 14952 वोट मिले।

सीपीएम ने जीता था पहला चुनाव
वहीं 1977 में पहली बार यहां हुए विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो इस सीट पर सबसे पहले खाता भी सीपीएम ने खोला था। उस वक्त सीपीएम ने इस सीट से ब्रजमोहन जमातिया को उतारा था। उनके खिलाफ कांग्रेस के काशीराम रेंग मैदान में थे। ब्रज मोहन ने ये चुनाव 532 वोटों से जीता था। उसके खाते में 3603 तो काशीराम को 3071 वोट मिले थे। हालांकि 1983 में हुए चुनाव ने कांग्रेस के काशीराम ने बाजी मारते हुए ब्रजमोहन को उन्हें के मैदान में पस्त कर दिया। उन्होंने ये चुनाव 491 वोटों से जीता। काशीराम को 6718 तो वहीं ब्रजमोहन को 6227 वोट मिले।

कांग्रेस और सीपीएम के बीच रही थी कड़ी टक्टर
1988 से 1998 के बीच यहां तीन बार विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें दो बार सीपीएम ने तो एक बार कांग्रेस ने बाजी मारी। 1988 में सीपीएम ने इस सीट से तीसरी बाद ब्रजमोहन जमातिया को टिकट दिया। इस बार उनके खिलाफ  कांग्रेस ने काशीराम की जगह ब्रजमोहन त्रिपुरा को खड़ा किया। हालांकि ये सीट सीपीएम के खाते में ही गई। सीपीएम के उम्मीदवार जमातिया ने महज 118 वोट से ये चुनाव जीत लिया। उन्हें 7800 तो कांग्रेसी उम्मीदवार को 7682 वोट मिले। हालांकि 1993 में कांग्रेस ने एक बार फिर इस सीट पर अपनी वापसी की। इस बार कांग्रेसी उम्मीदवार ब्रिजेंद्र मोग चौधरी ने सीपीएम के उम्मीदवार गीतामोहन त्रिपुरा को 1028 वोट से हरा दिया। चौधरी को 9385 तो वहीं गीतामोहन को 8357 वोट मिले। 1998 में इस विधानसभा सीट की तस्वीर एक बार फिर बदल गई। ये सीट फिर से सीपीएम के खाते में आ गई। सीपीएम के उम्मीदवार गीतामोहन ने यह चुनाव 6060 वोटों से जीत लिया। उनके खाते में 11554 तो कांग्रेसी उम्मीदवार ब्रिजेंद्र मोग चौधरी को 5494 वोट मिले।