भारतीय जनता पार्टी और अगप की सरकार कभी भी  क्षेत्रीय राजनीती की मित्र नहीं हो सकती।  गुवाहाटी प्रेस क्लब में शुक्रवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में क्षेत्रीय राजनीती के पैरोकार नेताओं ने भाजपा को आड़े हाथों लते हुए एक स्वर में यह बात कही । 

मौजूदा  राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए अगप नेता लाचित बरदलै ने कहा कि भाषा के आधार पर परवान चढ़ी क्षेत्रीय राजनीती आंचलिकतावाद  के आदर्श पर टिकी है, जबकि भाजपा धर्म को अग्राधिकार देते हुए हिंदुओं के लिए स्वभूमि की बात कहती है । उन्होंने कहा कि  आंचलिकतावादी राजनीती में आ रही गिरावट का हमे रोकना ही होगा।  

इस संवाददाता सम्मलेन में श्री बरदलै के अलावा बिमल प्रसाद चौधरी, अदीप कुमार फूकन, अनूप फुलन, संजीव तालुकदार, मीरा बरठाकुर , डा. धीरेश्वर तालुकदार, मेहंदी आलम बोरा, लीला  सइकिया, कृष्णा शर्मा आदि ने भी संबोधित किया वक्ताओं ने असम गण परिषद के विपरीत स्थिति खड़ी भाजपा के साथ मिलकर राजनीति करने को असमिया समाज जीवन के लिए नुकसानदेह बताया और कहाकि राज्यवासी इस स्तर की राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे और  करना भी नही चाहिए । 

सभी ने कहा कि खर्गेश्वर तालुकदार से आरंभ कर 855 असमिया युवा शहीद हो गए , इसके बाद भी विदेशी को स्वदेशी बनाने वाले भाजपा  mके निर्णय को क्या हम स्वीकार कर सकेंगे। उन्होंने कहाकि छह साल के असम आंदोलन के दोरान बहुत सी घटनाएं घटी, जिन्हें अगप भूलने की कोशिश में लगी है। 

 उन्होंने कहा कि असम आंदोलन में शहीद हिंदू-मुसलमान युवाओं ने अपनी जाति के लिए नही असम को विदेशी मुक्त बनाने के लिए आंदोलन किया और  मौत को गले लगाया था। अगप नेतृत्व ऐसा सभी घटनाओं को भूलने की कोशिशों में लगा है।  सभी वक्ताओं ने यह भी कहा कि सुनने में भले ही बुरा लगे, अगप आज अविश्वास के संकट से गुजर रही है। सभी ने कहा कि नई  पीढ़ी को एक सुरक्षित व स्वस्थ्य समाज देवे के लिए प्रगतिशील जातीयतावाद की धारा को आगे बढ़ाना ही होगा ।