सत्ता की चाह कुछ ऐसी होती है कि इसको पाने के लिए कभी एक दूसरे के कट्टर विरोधी रहे नेता भी हाथ मिलाने से नहीं कतराते कुछ ऐसा ही दिखने को मिला मिजोरम में, जहां राज्य में चकमा स्वायत्त जिला काउंसिल (सीएडीसी) में शासन करने के लिए भाजपा ने कांग्रेस से हाथ मिलाया है। एक शीर्ष भाजपा नेता ने बताया कि छह सदस्यों के समर्थन के साथ सत्तारूढ़ होना लगभग तय है।

20 सदस्यों वाली सीएडीसी में एमएनएफ ने आठ, कांग्रेस ने छह और भाजपा ने पांच सीटें जीती थी। सीएडीसी बांग्लादेश और म्यांमार सीमा पर दक्षिण-पश्चिम मिजोरम में रहने वाले चकमा लोगों का स्वायत्त संगठन है। पारंपरिक रूप से विरोधी दलों का हाथ मिलाना अपने आप में एक रोचक राजनीतिक घटना है।


भाजपा नेता ने कहा कि सीएडीसी में पांच सदस्यों के साथ भाजपा काउंसिल का नेतृत्व करेगी। राज्य के खेल मंत्री और कांग्रेस नेता जोडिंटलुआंगा ने 25 अप्रैल को कहा था कि दोनों दलों के स्थानीय नेताओं के समझौते के बाद चुनाव बाद का गठबंधन हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


बता दें कि चकमा स्वायत्त जिला परिषद का गठन 29 अप्रैल 1972 को संविधान की छठी अनुसूची के तहत किया गया था। इस स्वायत्त परिषद के पास अपनी विधायी, कार्यकारी और न्यायिक शक्तियां हैं। यह परिषद करीब 650 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां करीब 45000 लोग रहते हैं।

परिषद की नई सरकार के लिए बीजेपी-कांग्रेस के नेताओं के बीच हुई डील के मुताबिक परिषद के अध्यक्ष का पद बीजेपी को दिया गया है। बीजेपी के शांति जीवन चकमा काउंसिल के सीईओ होंगे। मिजोरम में हुई इस राजनीतिक उठापटक से बीजेपी खेमे में बेचैनी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी इस मामले में कार्रवाई कर सकती है।