असम में नागरिकता संशोधन बिल के मुद्दे पर दो महीने पहले ही भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ने वाली असम गण परिषद लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर साथ हो गई है। दोनों पार्टियां राज्य में एक साथ चुनाव लड़ने जा रही हैं। बीजेपी के महासचिव राम माधव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और असम गण परिषद ने असम में कांग्रेस को हराने के लिए आगामी लोकसभा चुनाव में एकसाथ आने का फैसला किया है। असम के 14 संसदीय सीटों के लिए 11, 18 और 23 अप्रैल को तीन चरणों में मतदान होना है।


राम माधव ने कहा, बीजेपी ने असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हम एकसाथ सुनिश्चित करेंगे कि राज्य में सभी 14 सीटों पर कांग्रेस को हराया जाए। बता दें कि दो महीने पहले 7 जनवरी को नागरिकता संशोधन बिल के मुद्दे पर एजीपी ने राज्य की एनडीए सरकार से नाता तोड़ लिया था। हालांकि राज्य सरकार को एजीपी के गठबंधन से अलग होने पर कोई नुकसान नहीं हुआ था।


ज्ञात हो कि बीजेपी, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट ने 2016 असम विधानसभा चुनाव में एक साथ चुनाव लड़कर राज्य में सरकार बनाई थी। राज्य में 2001 से लगातार 3 बार सत्ता में रह चुकी कांग्रेस को हराकर पूर्वोत्तर में बीजेपी ने बड़ा सेंध लगाया था। 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में बीजेपी के 61 सदस्य हैं और उसे एक निर्दलीय विधायक का समर्थन प्राप्त है जबकि इसके सहयोगी बीपीएफ के 13 सदस्य हैं, एजीपी के 14 विधायक, कांग्रेस के 24 और एआईयूडीएफ के 13 सदस्य हैं।


साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए के सहयोगियों ने एक साथ मिलकर 11 सीटें जीती थी, जिसमें बीजेपी को 8 सीटें मिली थीं। एनडीए के सहयोगियों में नागा पीपुल्स फ्रंट (एक सीट), मेघालय पीपुल्स पार्टी (एक सीट) व सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एक सीट) शामिल हैं। बीजेपी ने असम में 7 सीटें व अरुणाचल प्रदेश में 1 सीट जीती थी।


कांग्रेस का 1952 से पूर्वोत्तर मजबूत गढ़ रहा है। वह 2014 में आठ सीटें जीतने में कामयाब रही थी। कांग्रेस ने असम में तीन, मणिपुर में दो व अरुणाचल प्रदेश, मेघालय व मिजोरम प्रत्येक में एक-एक सीट पर विजय हासिल की थी। ज्ञात हो कि पूर्वोत्तर में लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं।