असम के विस्वनाथ जिले के बच्चे हर रोज अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर पढ़ने के लिए स्कूल जाते थे। इन दिनों एक वीडियो सामने आया है जिसमें स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे एल्यूमीनियम के बर्तन से नदी पार कर रहे हैं। लेकिन बता दें कि अब विस्वनाथ जिले में पचिम कुरुति एलपीएस स्कूल के बच्चों को एल्यूमीनिय के बर्तन के सहारे नदी पार करके स्कूल आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जिला प्रशासन ने बच्चों के स्कूल तक पहुंचने के लिए एक नांव तैनात कर दी है। 

तो इस कारण से बच्चों को बर्तन के सहारे पार करना पड़ता था पुल
बता दें कि जिले में डिलाधारी नदी को पार करने के लिए कोर्इ पुल नहीं है, जिस कारण से यहां के बच्चे दो साल से ज्यादा समय से स्कूल पहुंचने के लिए एल्यूमीनियम के बर्तन का इस्तेमाल करते थे। जिन बच्चों ने स्कूल जाने के लिए अपने जीवन को खतरे में डाला था वे शुक्रवार को बेहद खुश थे। क्योंकि अब उन्हें स्कूल जाने के लिए नाव मिल गर्इ है।

पुल बच्चों के संघर्ष आैर जाेखिम को करेगा कम
इसके साथ ही विस्वनाथ के भाजपा विधायक प्रमोद बोरथाकुर ने शुक्रवार को कहा कि नदी पर लोहे का पुल भी बनवाया जाएगा आैर निर्माण कार्य अगVideo  वायरल होते ही उड़े भाजपा के होश, आनन-फानन में करना पड़ा ये कामले 15 दिनों में शुरू होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे बच्चों के इस संघर्ष के बारे में पता नहीं था। विधायक ने कहा कि हम कंकरीट का पुल नहीं बना सकते हैं तो हम लोहे के पुल का निर्माण करेंगे। विधायक ने विधानसभा में कहा कि पुल बच्चों के संघर्ष आैर जाेखिम को कम करेगा।


भाजपा विधायक ने पूरा किया वादा

वीडियाे देखने के बाद भाजपा विधायक बोरथाकुर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वो इस तस्वीर को देखकर शर्मिंदा हैं। उन्होंने ये भी कहा ‘पीडबल्यूडी की कोई सड़क इस इलाके में नहीं है। आखिर कैसे प्रशासन ने इस इलाके में स्कूल बना दिया जहां पहुंचने की कोई सुविधा नहीं है। हम बच्चों के लिए नांव का इंतजाम करेंगे। मैं जिलाअधिकारी से कहूंगा कि वो स्कूल को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करे।’


टीचर को थी बच्चों की चिंता
स्कूल के टीचर डे दास ने कहा कि ‘उन्हें इस तरह बच्चों को स्कूल आता देख उनकी चिंता होती है। बच्चे एलमुनियम के घड़ों में बैठकर नदी पार करते हुए स्कूल पहुंचते हैं क्योंकि इलाके में कोई पुल नहीं है। इससे पहले वो केले के पेड़ के तने से बनी नाव पर बैठकर स्कूल आते थे।’सितंबर में अरुणाचल और असम में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे क्योंकि रनगंधी डाम को पानी के अत्याधिक दवाब के बाद खोल दिया गया था जिससे असम के 70 गांव डूब गए थे। इससे दो जिलों को काफी नुकसान पहुंचा था।