नागालैंड के मुख्यमंत्री और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के नेता काफी चर्चित चेहरे हैं। साल 2018 में हुए नागालैंड विधानसभा चुनाव से पहले ही नेफ्यू ने अपना दबदबा दिखा दिया था। दरअसल रियो को नॉर्दन अंगामी-2 विधानसभा क्षेत्र से निर्विरोध जीत हासिल की थी। चुनाव के वक्त रियो अपनी संपत्ति को लेकर काफी चर्चाओं में रहे थे। साल 2018 के मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में जितने उम्मीदवार खड़े हुए हैं, उनमें संपत्ति के लिहाज से रियो दूसरे नंबर पर आते हैं।


कुल संपत्ति है 27.91 करोड़
चौथी बार नागालैंड के मुख्यमंत्री बनने वाले नेफ्यू रियो की कुल संपत्ति 27.91 करोड़ है। बताया जा रहा है कि उनकी यह संपत्ति पिछले पांच सालों में 9 करोड़ रुपए की दर से बढ़ी है। वहीं पूर्व कांग्रेसी और वर्तमान में भाजपा के नेता के एल चिशी की कुल संपत्ति 37 करोड़ रुपए आंकी गई है, जो सभी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा संपत्ति के मालिक हैं। नेफ्यू रियो की कुल चल संपत्ति 10 करोड़ से उपर की है, जिसमें से एक लैंड क्रूजर प्राडो जो 64 लाख की है वहीं दूसरा बीएमडब्ल्यू मिनी एफ-56 कूपर जो 35.5 लाख की है।


3.06 करोड़ की संपत्ति विरासत में मिली
इसके अलावा उनकी अचल संपत्ति 17.91 करोड़ की है, जिसमें 3.06 करोड़ की संपत्ति उन्हें विरासत में मिली है, जबकि बाकी खुद की अर्जित संपत्ति है। 67 वर्षीय रियो जो नागालैंड में भाजपा के सबसे करीबी नेता बन कर उभरे हैं। उन्होंने अपने शपथपत्र में सांसद के तौर पर अपना वेतन, किराये से आने वाली आय, कृषि और जमा पूंजी से आने वाला ब्याज समेत अपनी कुल संपत्ति की घोषणा की है।


रियो की पत्नी के पास है 10.26 करोड़ की संपत्ति
रियो की पत्नी की कुल चल-अचल संपत्ति मिलाकर 10.26 करोड़ का ब्यौरा दिखाया गया था। रियो दंपत्ति के पास नागालैंड में दो रिजॉट्र्स भी है। चुनाव से पूर्व नेफ्यू रियो लोकसभा सांसद थे। रियो 2014 के लोकसभा चुनाव में नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के टिकट पर सांसद बने थे। रियो ने चुनाव पूर्व ही एनपीएफ से इस्तीफा देकर एनडीपीपी में शामिल हुए थे।


बता दें कि रियो 1989 में नागालैंड के अंगामी पार्टी से चुनाव लड़ा और विधायक बने। चुनाव जीतने के बाद उन्हें शिक्षा व खेल मंत्रालय का जिम्मा संभाला। रियो ने नागालैंड इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद भी संभाला। नेफ्यू रियो ने जब कांग्रेस छोड़ा उस वक्त वह नागालैंड के गृह मंत्री थे। नागा मुद्दे पर भड़क कर उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एससी जमीर को अपना त्यागपत्र सौंप दिया था। कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद रियो ने 'नागा पीपल्स फ्रंट' ज्वाइन कर लिया। इस दौरान उनकी नजदीकी भाजपा से बढ़ती गयी। 2003 में उन्होंने भाजपा के साथ चुनाव लड़ा और कांग्रेस की सत्ता को उखाड़कर फेंका। दस साल तक लगातार सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी का प्रभाव समाप्त होने लगा।

नागालैंड में नेफ्यू रियो को सबसे बड़ा नेता माना जाता है। विरोधियों में भी उनका सम्मान किया जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक वह नागालैंड के सबसे अमीर नेताओं में भी गिने जाते हैं। 2003 में कांग्रेस से टूटने के बाद उन्होंने नागा पीपल्स फ्रंट से नाता जोड़ा। नेफ्यू रियो ने एक बार फिर नागा पीपल्स फ्रंट से नाता तोड़ा और नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी बना बीजेपी से जुड़े।

नेफ्यू रियो नागालैंड के पहले ऐसे नेता हैं जो चौथी बार सीएम बने हैं। वे अंगामी नागा आदिवासी हैं। 68 वर्षीय नेफ्यू रियो नेे शुरुआती शिक्षा कोहिमा के बेपटिस्ट इंग्लिश स्कूल में हासिल की। फिर उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुरलिया में सैनिक स्कूल से पढाई की। उन्होंने दार्जिलिंग के सेंट जोसेफ कॉलेज व कोहिमा को आर्ट कॉलेज में उच्च शिक्षा हासिल की।