झारखंड के रहने वाले पन्नालाल महतो में ऐसा हुनर है कि वो पक्षियों से बातें करते हैं। पक्षियों की भाषा और उनके जीवन पर लगभग 26 सालों से अध्ययन करने वाले पन्नालाल को लोग बर्डमैन कहकर बुलाया जाता है।

कौआ, कोयल जैसे आमपक्षियों की आवाजें तो कई लोग निकाल लेते हैं, पर पक्षियों को लेकर बर्डमैन पन्नालाल की समझ का अंदाजा इस बात से लग जाता है कि वो कई ऐसे पक्षियों की भाषा बोल लेते हैं तो बहुत कम देखने को मिलते हैं और कई तो विलुप्त होने के कगार पर हैं।

पन्नालाल 198 तरह के पक्षियों की आवाज सुनकर उनकी पहचान बता सकते हैं और 42 पक्षियों की आवाज निकाल लेते हैं। सिर्फ साधारणआवाज ही नहीं, पक्षी कुछ खास परिस्थितियों में किस तरह बोलते हैं, पन्नालाल इसे बखूबी समझते हैं और पक्षियों से बात भी करलेते हैं।

पन्नालाल बताते हैं कि घने जंगल में रहने वाले पक्षियों को किसी भी तरह के खतरे का आभास पहले ही हो जाता है और वे अपनी भाषा और उड़ान के तरीके इसका संदेश देते हैं। इसे समझने की क्षमता के सहारे बर्डमैन पन्नालाल ने कई बार लोगों को खतरे से भी बचाया है।पक्षियों के ऐसी ही संदेश को पढ़ते हुए उन्होंने एक वन अधिकारी को लकड़बग्घों की झुंड से बचाया था।

बर्डमैन पन्नालाल रोजोना करीब दस घंटे जंगलों और पक्षियों के बीच बिताते है। रामगढ़ जिले के रहने वाले बर्डमैन झारखंड ही नहींउत्तराखंड, हिमाचल, असम और पूर्वात्तर भारत का भी भ्रमण करते रहे हैं। ये सबकुछ उन्होंने अपने खर्च पर किया है। पक्षियों औरउनके प्रति लोगों के बीच जागरुकता फैलाने के लिए वो और काम करना चाहते हैं और इसके लिए सरकार ने मदद की अपील भीचाहते हैं।