मोकामा विधायक अनंत सिंह के पैतृक गांव नदवां स्थित घर से बरामद एके-47, और दो हैंड ग्रेनेड के दर्ज मुकदमे में 200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद स्पीडी ट्रायल की तैयारी तेज कर दी गई है। बीते मंगलवार को ही केस की आईओ एएसपी लिपि सिंह ने कई अहम सबूतों के साथ पटना जिला न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष द्विवेदी की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। यूएपीए केस में विधायक अनंत सिंह और उनके केयरटेकर सुनील राम न्यायिक हिरासत में हैं।


बताया गया है कि यह रिपोर्ट बाढ़ एसपी लिपि सिंह के नेतृत्व में कई थानाध्यक्षों की मदद से तैयार की गई है। इसे फुलप्रूफ बनाने की पूरी तैयारी पुलिस ने की है। पुलिस ने दावा किया है विधायक और सुनील राम के खिलाफ कई ठोस साक्ष्य व गवाहों के बयान भी केस डायरी में अंकित हैं। सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर गवाह पुलिस पदाधिकारी बनाए गए हैं।

 
इसी साल 16 अगस्त को पुलिस अधिकारियों ने गुप्त सूचना के बाद अनंत सिंह के पैतृक घर में छापा मारा था। इस दौरान एके 47 कार्बन पैकिंग में आलमारी में मिली थी। इसके बाद केयरटेकर सुनील राम को गिरफ्तार कर लिया गया था। एक्सपर्ट की सलाह पर इस मामले में यूएपीए की विभिन्न धारा लगाई गई थी। अनंत सिंह को साकेत बिहार कोर्ट में सरेंडर करने के बाद बाढ़ पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। केस में पुलिस ने रिमांड के दौरान विधायक के बयान, कई जांच रिपोर्ट तथा उनके आपराधिक रिकॉर्ड को पुलिस ने अपना कानूनी हथियार बनाया है।

 

पंडारक के भोला सिंह और उसके भाई मुकेश सिंह की हत्या की साजिश के मामले में वायरल हुए ऑडियो को भी पुलिस ने इस केस में सबूत के तौर पर अंकित किया है। इस मामले में पंडारक पुलिस पहले ही बाढ़ के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में आरोपपत्र दायर कर चुकी है। जिस पर सुनवाई चल रही है। हालांकि अनंत सिंह के समर्थक लगातार पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, अनंत सिंह भी अपने ऊपर लगे आरोप से इनकार कर रहे हैं।

बाढ़ कोर्ट में भी अनंत सिंह के अधिवक्ता की तरफ से पुलिस जांच को लेकर अर्जी दी गई थी, जिसमें कई बिन्दुओं को उठाया गया था। बहरहाल, एके-47 बरामदगी मामले में पुलिस द्वारा स्पीडी ट्रायल शुरू करने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विचार विमर्श किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद मुकदमे का विचारण शुरू कराए जाने की संभावना है। उसके बाद केस डायरी में अंकित तमाम गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए जाएंगे। लिहाजा अब अनंत सिंह की मुसीबत और बढ़ेगी।
 


अनंत सिंह की नियमित जमानत के लिए दी गई अर्जी बुधवार को वापस ले ली गई, क्योंकि पुलिस ने केस डायरी के साथ चार्जशीट पटना सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया है। विधायक के वकील सुनील कुमार ने बताया कि अनंत सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश बाढ़ ने संबंधित कांड के अनुसंधानकर्ता से केस डायरी की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने केस डायरी दाखिल नहीं की।
 


अनंत सिंह के खिलाफ दायर चार्जशीट की धारा के तहत संज्ञान लेने के बाद सीजेएम इस मामले को ट्रायल के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट के सेशन कोर्ट या मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेज सकते हैं। इससे पूर्व मामले में दौरा-सुपुर्दगी के लिए भागलपुर जेल में बंद विधायक की पेशी होगी। इसके लिए भागलपुर जेल प्रशासन की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए पेशी कराने की तैयारी की जा रही है।
 


आईओ एएसपी लिपि सिंह ने पटना सीजेएम कोर्ट में चार्जशीट दायर करने के लिए दारोगा रविरंजन सिंह को भेजा था। रविरंजन सिंह के साथ पंडारक के थानेदार और सह इस कांड के सूचक संजीत कुमार के साथ चार्जशीट दाखिल करने आए थे। विधायक अनंत सिंह और उनके नौकर सुनील राम के खिलाफ की गई चार्जशीट में आईपीसी की धारा 414, 120 बी, आर्म्स एक्ट 25 (1-ए), 25 (1-एए), 25 (1-बी)ए, 25 (1-बी)सी, 26, 35, विस्फोटक अधिनियिम और 13 यूएपीए एक्ट के तहत चार्जशीट दायर की है। विधि जानकारों के मुताबिक इनमें 25 (1-ए) में दोष सिद्ध होने पर 5 से 10 की सजा, 25 (1-एए) में 7 साल से लेकर आजीवन कारावास का प्रावधान है।