बिहार में आज से फिर लॉकडाउन लागू हो गया है। इस बार लॉकडाउन को 31 जुलाई तक के लिए बढ़ाया गया है। इस दौरान सभी सरकारी कार्यालयों से धार्मिक स्थल तक बंद रहेंगे। लॉकडाउन में राज्य, जिला, अनुमंडल और ब्लॉक मुख्यालय के अलावा सभी नगर निकायों में यह प्रभावी है। यानि लॉकडाउन को ग्रामीण क्षेत्रों को मुक्त रखा गया है। लॉकडाउन के दौरान धार्मिक स्थलों और पार्कों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन और खेल-कूद समेत तमाम भीड़भाड़ वाले आयोजन नहीं होंगे। बाजार और मॉल भी नहीं खुलेंगे।

केन्द्र और राज्य सरकार के दफ्तर भी बंद कर दिए गए हैं। हालांकि आवश्यक सेवाओं में शामिल कार्यालयों को इससे अलग रखा गया है। वहीं जिन दफ्तरों में कामकाज होगा वहां भी मात्र 33 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति रहेगी। इससे ज्यादा कर्मचारियों के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, प्रशिक्षण व अनुसंधान से जुड़े तमाम संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोरोना संक्रमण के चलते बनाए गए कंटेनमेंट जोन  में पहले की तरह पाबंदियां बरकरार हैं। गैराज और मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर डीएम की अनुमति के बाद ही खोले जा सकते हैं।

टैक्टी और ऑटो स्थानीय स्तर चलेंगे। क्लिनिक, अस्पताल, दवा दुकान व जांच घर खुले रहेंगे। ई-कॉमर्स, बैंक, बीमा संस्थान, केबल, दूरसंचारव व आईटी सेवाएं को भी लॉकडाउन से छूट। राशन, दूध, सब्जी, फल, मीट-मांस और पशुचारा की दुकानें खुली रहेंगी। औद्योगिक और निर्माण गतिविधियां पहले की तरह चलेंगी। निर्माण कार्य और कृषि से जुड़ी दुकानें भी खुलेंगी। राज्य में कहीं भी बसों के परिचालन नहीं होगा। निजी गाड़ियों का इस्तेमाल वही लोग कर सकते हैं जो आवश्यक सेवाओं से जुड़े हैं और लॉकडाउन में उन्हें छूट दी गई है। निजी गाड़ियों का परिचालन नहीं हो सकता है।

लॉकडाउन में पूरे राज्य के मठ व मंदिर में प्रवेश निषेध रहेगा। बिहार धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि 16 से 31 जुलाई तक पूरे राज्य में लॉकडाउन है। इस दौरान राज्य के सभी मठ व मंदिरों में केवल पुजारी व महंथ ही भगवान की नियमित पूजा पाठ व अर्चना करेंगे। मंदिरों में मेला या उत्सव का आयोजन भी नहीं होगा। बिहार धार्मिक न्यास पार्षद में 31 जुलाई तक कोई भी केस की सुनवाई नहीं होगी।