देश के दूसरे हिस्से से बिहार में अवैध शराब भेजने वाले तस्करों पर अब दोहरी कार्रवाई होगी। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से दूसरे राज्यों के करीब साढ़े चार हजार से ज्यादा शराब तस्कर पकड़े जा चुके हैं। बिहार में उन पर मद्य निषेध कानून के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई तो होगी ही, साथ में उनके गृह राज्य और जिले में भी उनके अपराध से जुड़ी रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि वहां की पुलिस भी उनकी पहचान कर अग्रेतर कार्रवाई कर सके। शराब तस्करी पर प्रभावी रोक के लिए मद्य निषेध विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया है।

राज्य में वर्ष 2016 से शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में शराब बिहार भेजी जा रही है। मद्य निषेध पुलिस ने पिछले पांच सालों में करीब साढ़े चार हजार ऐसे शराब तस्करों को पकड़ा है, जो दूसरे राज्यों के हैं। अभी तक मद्य निषेध कानून के तहत गिरफ्तार कर तस्करों को जेल भेजा जाता है, मगर जेल से छूटने के बाद वे दोबारा शराब की तस्करी में जुट जाते हैं। ऐसे में विभाग ने तय किया है कि गिरफ्तारी के बाद चार्जशीट होते ही इसकी जानकारी उनके गृह राज्य और जिला पुलिस को दी जाएगी, ताकि उनकी पहचान उजागर हो सके।

बिहार में शराब भेजने वाले अधिसंख्य तस्कर अपने राज्य में शराब के लाइसेंसी ठीकेदार होते हैं। वे अपनी दुकान या ठीके के नाम पर शराब का उठाव करते हैं, मगर उसे तस्करी कर बिहार भेज देते हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद भी साक्ष्य और जानकारी के अभाव में उनके शराब के ठीके पहले की तरह चलते रहते हैं। अब उनके गृह राज्य को सूचना देने के बाद उनके शराब लाइसेंस व ठीके आदि पर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई कर सकेगा। 

अभी तक पकड़े गए करीब साढ़े चार हजार शराब तस्करों में अकेले बंगाल के 550 शराब तस्कर हैं। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों के भी बड़ी संख्या में शराब तस्कर पकड़े गए हैं। मद्य निषेध टीम की ओर से ऐसे बाहरी तस्करों की सूची राज्यवार तैयार की जा रही है। उसके बाद गृह राज्य को जानकारी देने की शुरुआत की जाएगी।