बिहार सरकार ने अति पिछड़ा वर्ग के युवक-युवतियों को लघु एवं सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद दिए जाने की घोषणा की। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव डॉ. दीपक प्रसाद ने आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद बताया कि राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवा एवं युवतियों के साथ-साथ अति पिछड़ा वर्ग के युवा-युवतियों को भी सुक्ष्म एवं लघु उद्योग स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उद्यमी योजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। 

उन्होंने बताया कि इसके तहत 102.50 करोड़ की योजना की मंजूरी दी गई है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में संचालित अन्य पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं प्राप्त करने वाले 1.50 लाख से अधिक एवं 2.50 लाख तक की वार्षिक आय अधिसीमा के तहत अर्हता रखने वाले अत्यंत पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवृति प्रदान करने के लिए वित्त वर्ष 2019-20 से ‘‘मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृति योजना’’ की स्वीकृति दी गई। उन्होंने बताया कि योजना का क्रियान्वयन शिक्षा विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। 

प्रधान सचिव ने बताया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास योजना के तहत लखीसराय, समस्तीपुर, दरभंगा, खगडिय़ा, सीवान एवं वैशाली जिले में छात्रावास निर्माण के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना से प्राप्त पुनरीक्षित प्राक्कलन 26 करोड़ नौ लाख 80 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि योजना लागत में हुई वृद्धि के फलस्वरूप 12 करोड़ 75 लाख 88 हजार रुपये का वहन बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के द्वारा कॉर्पोरेट-सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत किया जाएगा। 

डॉ. प्रसाद ने बताया कि कटिहार जिले में जैविक खेती के लिए अंगीकरण एवं प्रमाणीकरण की योजना का वित्त वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक तीन वर्षों के लिए कुल छ: करोड़ 63 लाख 18 हजार रुपये की लागत पर कार्यान्वयन की स्वीकृति दी गई। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 में कुल एक करोड़ 98 लाख 28 हजार रुपये की निकासी एवं व्यय की मंजूरी दी गई है। प्रधान सचिव ने बताया कि हरित क्रांति योजना के कार्यान्वयन की स्वीकृति एवं चालू वित्त वर्ष में कुल 87 करोड़ 46 लाख रुपये की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति। 

उन्होंने बताया कि इसमें केन्द्रांश 52 करोड़ पांच लाख, राज्यांश 34 करोड़ 70 लाख रुपये तथा राज्य योजना 71 लाख रुपये शामिल है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि संयुक्त कृषि भवन मुंगेर के निर्माण के लिए सात करोड़ 96 लाख 13 हजार रुपये के पुनरीक्षित प्राक्कलन पर योजना कार्यान्वयन की स्वीकृति तथा वित्त वर्ष 2016-17 में इस योजना के लिए स्वीकृत एवं अव्यवहृत अवशेष राशि कुल पांच करोड़ 74 लाख 45 हजार रुपये का वित्तीय वर्ष 2019-20 में व्यय करने तथा चालू वित्त वर्ष में कुल दो करोड़ 21 लाख 68 हजार रुपये की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई है। 

कृषि विभाग के ही तहत राज्य स्कीम मद से ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के तहत खेत में जल संचयन एवं कृषि प्रबंधन की योजना के कार्यान्वयन की मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 में कुल 60 करोड़ रुपये की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गई। डॉ. प्रसाद ने बताया कि विभिन्न वर्ग समूहों के लाभुकों जैसे बालक, बालिका, शिशु के आवासन एवं पुनर्वास के लिए आश्रय गृहों की स्थापना एवं उसके समुचित संचालन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बाल आश्रय विकास योजना की स्वीकृति। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में आज कुल 29 आवेदन स्वीकृत की गई है।

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