बिहार में चुनाव बहुत ही दिलचस्प होता जा रहा है। वोटिंग हो रही है। सबको इंतजार है कि आखिर  कौन होगा बिहार का राजा किसके हाथ में आएगी बिहार की सत्ता। यह तो जनता प्रतिनिधी ही इसका फैसला करेगा। इसी बीच में बिहार में एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है जिसे देखने के बाद पता चलता है कि पूर्व सरकार ने बिहार के लिए कितना काम किया है। बता दें कि यह मामला नाथनगर विधानसभा में देखने को मिला है।


बता दें कि नाथनगर के मध्य विद्यालय कोलाखुर्द में दिव्यांग मतदान केन्द्र बनाया गया है जहां पर दूसरे चरण में दिव्यांग वोटर्स ही वोट दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां पर दिव्यांगों का गजब का उत्साह दिखने को मिल रहा है। गांव के लोग शिक्षित और समझदार हैं इसलिए कुछ लोग खुद तो मतदान केन्द्र पहुंचकर वोट कर रहे है साथ ही दिव्यांग वोटरों को भी वोटिंग के लिए तैयार कर रहे हैं क्योंकि गांव की शत-प्रतिशत लोग दिव्यांग है।


आधे से ज्यादा लोग यहां दिव्यांग ही है जो आसानी से चल नहीं पाते हैं। इसका सबसे मुख्य कारण है जिम्मेवार ओहदों पर काबिज नकारा अफसरशाही है। जिसके कारण गांव की बड़ी आबादी जिस पानी की पीती है वो पानी पानी नहीं बल्कि आर्सेनिक और फ्लोराइड का एक घोल है। यहां के लोगों की मान्यता है कि यह एक दैविक प्रकोप है लेकिन सच यही है कि सबकुछ जानते हुए भी यहां के नेता और अफसर कोई उपाय नहीं करते है। अब इन लोगों को उम्मदी है कि जो नई सरकार सत्ता में आएगी वो इस गांव को आर्सेनिक और फ्लोराइड पानी से मुक्ति दिलाएगी।