कोवीशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के चेयरमैन सायरस पूनावाला ने वैक्सीन कॉकटेल का विरोध किया है। पूनावाला ने शुक्रवार को कहा कि बेहतर एफिकेसी के लिए मैं दो अलग-अलग टीकों के मिश्रण के खिलाफ हूं। इसकी कोई जरूरत नहीं है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की स्टडी में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन के कॉकटेल के नतीजे अच्छे मिले हैं। इस सवाल पर पूनावाला ने कहा, यदि कॉकटेल के टीके लगाए जाते हैं और परिणाम अच्छा नहीं होता है, तो हम कहेंगे कि एक और वैक्सीन अच्छा नहीं थी। ठीक इसके विपरीत दूसरी कंपनी कह सकती है कि चूंकि आपने सीरम के टीके को मिलाया है, इसलिए परिणाम अच्छे नहीं मिले।' उन्होंने आगे बताया कि वैक्सीन कॉकटेल के ट्रायल में हजारों लोगों को शामिल किया गया था, जिसमें इसकी एफिकेसी अच्छी नहीं रही।

देश में कोरोना वैक्सीन की मिक्सिंग पर हुई पहली स्टडी के नतीजे पांच दिन पहले ICMR ने जारी किए थे। स्टडी में कहा गया कि कोवैक्सिन और कोवीशील्ड की मिक्स डोज से कोरोना वायरस के खिलाफ बेहतर सुरक्षा मिलती है।

ICMR के मुताबिक, एडिनोवायरस वेक्टर प्लेटफार्म वैक्सीन और इनएक्टिवेटेड होल वायरस वैक्सीन का मिक्स डोज लेना सेफ है। इन दोनों वैक्सीन की अलग-अलग डोज से एक ही वैक्सीन के दो डोज की तुलना में बेहतर इम्यूनिटी मिलती है।

कोरोना वैक्सीन मिक्सिंग की यह स्टडी ICMR ने मई-जून के बीच में यूपी में की थी। DCGI के एक्सपर्ट पैनल ने कोवीशील्ड और कोवैक्सिन के मिक्स डोज की स्टडी का सुझाव दिया था। इसके बाद क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर को भी वैक्सीन के मिक्स ट्रायल डोज की अनुमति दी गई थी।

कोरोना के खिलाफ भारत बायोटेक के नेजल वैक्सीन (नाक से स्प्रे के जरिए दी जाने वाली) को सेकेंड और थर्ड फेज के क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति मिल गई है। पहले फेज में इस वैक्सीन का ट्रायल 18 से 60 साल के एज ग्रुप पर किया जा चुका है।

इस समय देश में तीन वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सिन, सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड और रूस की स्पुतनिक वी आम लोगों के लिए उपलब्ध है। सरकार ने मॉडर्ना की एमआरएनए वैक्सीन और जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।