कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के मुंबई कार्यालय के कर्मचारियों ने सांठगांठ करके कथित रूप से 21 करोड़ रुपये के पीएफ फंड घोटाले को अंजाम दिया है।  ये फंड एक कॉमन पीएफ पूल था, जिस पर हाथ साफ करने के लिए ईपीएफओ कर्मचारी ने फर्जी निकासी का सहारा लिया।  

ईपीएफओ की जांच में इस घोटाले का मास्टरमाइंड चंदन कुमार सिन्हा को पाया गया है।  37 वर्षीय सिन्हा ईपीएफओ के कांदिवली स्थित ऑफिसर में क्लर्क की पोस्ट पर तैनात है और इसने 21.5 करोड़ रुपये का घोटाला करने के लिए 817 बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया।  ये बैंक अकाउंट प्रवासी मजदूरों के थे, जिनके जरिए 21.5 करोड़ रुपये निकालकर सिन्हा ने अपने खातों में जमा किया। 

जिन खातों से पैसे निकाले गए हैं, उनमें से 90 फीसदी पैसा किसी और अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया गया है।  घोटाले का आरोपी सिन्हा फरार हैं और ईपीएफओ कार्यालय के उन पांच कर्मचारियों में शामिल है, जिन्हें कथित घोटाले में शामिल होने के लिए निलंबित कर दिया गया है।  सूत्रों ने कहा कि जैसे ही आंतरिक जांच पूरी होगी, ईपीएफओ इस मामले को सीबीआई को सौंप देगा। 

हालांकि आंतरिक जांच अभी कांदिवली कार्यालय पर ही फोकस हैं, लेकिन इस घोटाले ने ईपीएफओ के सभी दफ्तरों को अलर्ट कर दिया है।  ईपीएफओ क्लाइंट और वित्तीय लेन-देन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन है।  प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईपीएफओ व्यक्तिगत रूप से बचत की गई 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के लेन-देन को संभालता है।  ईपीएफ मेंबरशिप औपचारिक रोजगार का संकेत है। 

ईपीएफओ फंड से फर्जी तरीके से निकाला गया पैसा पूल फंड से जुड़ा है, जो ईपीएफओ से जुड़े संगठन प्रत्येक महीने जमा करते हैं।  आम तौर पर ईपीएफओ इस पैसे को गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करता है।  एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “घोटाले में किसी व्यक्तिगत अकाउंट का दुरुपयोग नहीं हुआ।  फर्जीवाड़े में वहीं पैसा निकाला गया है, जो पूल फंड था और यह ईपीएफओ का नुकसान है, किसी व्यक्ति का नहीं।  यह एक तरीके से बैंक में डकैती की तरह है।