अगर आपने पोस्ट ऑफिस में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि (Sukanya Samriddhi), एनएससी (NSC), एफडी (Fixed Deposit) और आरडी अकाउंट (RD) खुलवाया है तो आपके लिए ये खबर काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि RBI ने सरकार को सुझाव दिया है कि अगर छोटी बचत योजनाओं (Small Saving Schemes) पर ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती कर दी जाए तो बैंकों के लिए कर्ज सस्ता करने की राह खुल सकती है। छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) तय करता है। आपको बता दें कि जून 2019 में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें 0.10 फीसदी तक कम की गई हैं।


मौजूदा समय में छोटी बचत योजना पर कितना मिल रहा है ब्याज-

(1) पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund (PPF interest Rate) - 7.90%
(2) सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Scheme Interest Rate) - 8.4% (3) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme Interest Rate)- 8.6%
(4) राष्ट्रीय बचत पत्र (National Savings Certificate (NSC) Interest Rate)- 7.9%
(5) किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra (KVP) Interest Rate) - 7.6% (6) पोस्ट ऑफिस टाइम डिपोजिट 5 साल के लिए (Post office time postie 5-years) Interest Rate)- 7.7%


खबर के मुताबिक, एमपीसी की बैठक के बाद RBI ने छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को घटाने संबंधी सुझाव दिया है। आपको बता दें कि हर तीन महीने पर छोटी बचत योजनाओं की नई दरें लागू की जाती हैं। लेकिन जुलाई के बाद इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह पिछली तिमाही के दौरान सरकारी बांड्स पर हुए मुनाफे के आधार पर दिया जाता है। पिछली दो तिमाहियों में सरकारी बांड्स पर प्राप्त ब्याज में कमी आई है।


एमपीसी की बैठक के बाद आरबीआइ की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेपो रेट में की जाने वाली कटौती का पूरा फायदा आम जनता तक नहीं पहुंच पाने के पीछे एक बड़ी वजह छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज की उच्च दरें हैं। RBI का कहना है कि छोटी अवधि की योजनाओं की ब्याज दर में 0.70 फीसदी से 1.10 फीसदी की कटौती की जा सकती है।


आरबीआई का कहना है कि इन छोटी बचत योजनाओं पर देय ब्याज की लागत बहुत ज्यादा पड़ती है जिसकी वजह से उनके फंड की लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से बैंक कर्ज सस्ता नहीं कर पाते। फरवरी-अक्टूबर, 2019 के दौरान आरबीआइ ने रेपो रेट में 1.35 फीसदी की कटौती की थी जबकि बैंकों की तरफ से कर्ज की दरों में महज 0.50 फीसदी तक की कटौती की है।