करीब 6 करोड़ ईपीपीएफओ सदस्यों के लिए बड़ी खबर है। मोदी सरकार मासिक पेंशन भुगतान की सुरक्षा के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा कवर किए गए औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों के भविष्य निधि और पेंशन खातों को अलग कर सकती है। 

दो सरकारी अधिकारियों के अनुसार सरकार ऐसा इसलिए करना चाहती है कि जब कर्मचारी अपना भविष्य निधि निकालते हैं तो वे अपने पेंशन फंड में से भी पैसा निकाल लेते हैं, क्योंकि पीएफ और पेंशन एक ही खाते का हिस्सा हैं।

महामारी के साथ ही बढ़ती बेरोजगारी की समस्या विकट हो गई है। पिछले साल महामारी के प्रकोप के बाद 31 मई 2021 तक कोविड एडवांस के तहत कुल 70.63 लाख कर्मचारियों ने पैसा निकाल लिया है। 

1 अप्रैल 2020 से ईपीएफओ द्वारा 19 जून 2021 तक कोविड एडवांस सहित लगभग 3.90 करोड़ दावों का निपटारा किया गया है।बता दें कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों द्वारा हर महीने 24% वैधानिक ईपीएफओ योगदान में से 8.33% ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना) और शेष ईपीएफ में जाता है। ईपीएफओ से किसी भी कारण से निकासी करते समय, ग्राहक अक्सर पेंशन राशि सहित अपनी सारी बचत निकाल लेते हैं।  सरकार के अनुसार यह सेवानिवृत्ति पेंशन लाभ प्रावधानों के उद्देश्य को झटका देता है

अधिकारी ने कहा , “ईपीएफओ के तहत, पीएफ और पेंशन योजनाओं में दो अलग-अलग खाते होने चाहिए। जबकि, कानून के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर पीएफ कोष निकालने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, पेंशन खाते को आदर्श रूप से अछूता रखा जाना चाहिए। 

इससे पेंशन आय में वृद्धि होगी और बेहतर सामाजिक सुरक्षा कवरेज की पेशकश की जाएगी।"अधिकारी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में एक आंतरिक सरकारी पैनल द्वारा ईपीएफ और ईपीएस खातों को अलग करने की सलाह देने के बाद ईपीएफओ बोर्ड की बैठक में इस मामले पर चर्चा की गई थी।

ईपीएफओ के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य बृजेश उपाध्याय ने कहा, जैसे-जैसे कोविड -19 दूसरी लहर कम हो रही है, आप इस मोर्चे पर और कार्रवाई देखेंगे। वे कहते हैं, “वर्तमान में, ईपीएफओ ग्राहक एक पूल खाता प्रणाली में हैं। ईपीएफ और पेंशन के लिए अलग खाते की जरूरत है। 

लोग अधिक पेंशन की मांग कर रहे हैं और उसके लिए दोनों खातों को अलग करना सबसे अच्छा समाधान है। एक बार जब वे अलग हो जाते हैं, तो एक ग्राहक पेंशन में अधिक योगदान कर सकता है और सेवानिवृत्ति के बाद अधिक पेंशन प्राप्त करने का पात्र बन सकता है।

उपाध्याय ने कहा कि दो अलग-अलग योजनाओं की संभावना है- एक प्रति माह 15,000 रुपये की वेतन सीमा से कम आय वालों के लिए और दूसरी उन सभी ग्राहकों के लिए जो अधिक कमा रहे हैं।सरकार वर्तमान में ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना के हिस्से के रूप में 15,000 रुपये से कम मासिक वेतन पाने वाले प्रत्येक पीएफ सदस्य की पेंशन में 1.16% का योगदान करती है।