उत्तर प्रदेश के कानपुर के हैलट अस्पताल में मुर्दों और डिस्चार्ज मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जाने मामले की जांच पूरी हो गई है।  तीन सदस्यीय गठित टीम ने अपनी रिपोर्ट जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रचार्य को सौंप दी है।  

शुरूआती जांच में हैलट के न्यूरो साइंस कोविड हॉस्पिटल की सिस्टर इंचार्ज और फार्मासिस्ट को सस्पेंड किया गया है।  इसके साथ ही जांच के आधार पर न्यूरो साइंस कोविड के अधीक्षक ने 8 नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है। 

जीएसवीए मेडिकल कॉलेज के प्रचार्य डॉ आर बी कमल ने डॉ ज्योति सक्सेना के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था।  रेमडेसिविर इंजेक्शन में हुई हेराफेरी की जांच सोमवार रात को पूरी कर ली।  डॉ ज्योति सक्सेना ने जांच टीम के सदस्यों के साथ मिलकर रिपोर्ट जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रचार्य को सौंप दी है।  इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम से प्रचार्य को अवगत कराया।  इस रिपोर्ट को बंद लिफाफे में शासन को भेजेगी जाएगी। 

कानपुर के हैलट अस्पताल में बने न्यूरों साइंस कोविड हॉस्टिपल में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा मांग रेमडेसिविर इंजेक्शन की थी। 

 मार्केट में ये इंजेक्शन ब्लैक में बिक रहा था, जरूरतमंद रेमडेसिविर इंजेक्शन को 40 से 50 हजार में खरीद रहे थे।  इसी दौरान हैलट के कोविड अस्पताल में भी रेमडेसिविर इंजेक्शन में फर्जीवाड़ा किया जा रहा था।  मुर्दो और डिस्चार्ज मरीजों के नाम पर इंजेक्शन स्टोर रूम से निकलवाए जा रहे थे।  इसके बाद ये इंजेक्शन कहां जा रहे थे, किसी को कुछ नहीं पता था। 

हैलट अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ ज्योति सक्सेना और उनकी टीम के सदस्य बालरोग विशेषज्ञ डॉ ऐके आर्या और चीफ फार्मासिस्ट राजेंद्र पटेल सोमवार सुबह से ही एक्शन मोड पर थे।  जांच टीम न्यूरों साइंस कोविड हॉस्पिटल पहुंची, और पूरे स्टाफ को तलब किया।  इसके बाद एक-एक कर्मचारी पूछताछ की। नर्सिंग स्टाफ, वार्ड ब्वॉय और फार्मासिस्टों से लंबी पूछताछ की गई। 

गठित जांच टीम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की खाली शीशियों का मिलान दस्तावेजों से किया।  इसके साथ ही मरीजों की बीएचटी (बेड हेड टिकट) को मंगा कर चेक किया गया।  पूछताछ के दौरान जांच टीम को रात की ड्यूटी में तैनात रहने वाली सिस्टर इंचार्ज मंजुलिका मिश्रा और फार्मासिस्ट नागेंद्र वाजपेई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, इस लिए दोनों पर कार्रवाई की गई है।  टीम की नजर में दो डॉक्टर और एक दर्जन स्टाफ संदिग्ध हैं। 

कोरोना की दूसरी लहर जब पीक पर थी।  उस दौरान क्राइम ब्रांच ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने में एक हैलट के नर्सिंग स्टाफ कर्मचारी को अरेस्ट किया था।  नर्सिंग स्टाफ कर्मी विक्रांत कुमार मरीजों को आधा रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाता था। 

 बाकी का बचा हुआ इंजेक्शन 10 हजार में बेच देता था।  प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ ज्योति सक्सेना का कहना है कि अभी प्रथम चरण की जांच पूरी हुई।  जिसके संबंध में प्रचार्य को अवगत करा दिया गया है। अभी इसकी जांच जारी रहेगी।