कोरोना से फैले दुनिया में खौफ ने 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू की याद आ गई हैं। 1918 में जब पूरी दुनिया प्रथम विश्व युद्ध के बाद के हालात से उबरने की कोशिश कर रही थी कि उसी समय स्पेनिश फ्लू ने दस्तक दी थी। जिसके कारण युद्ध में जितने लोग मारे गए उससे दो गुना लोग स्पेनिश फ्लू से दर्दनाक मौत का शिकार हुए। इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो उस दौरान दुनियाभर में करीब 5 करोड़ से 10 करोड़ लोग मारे गए थे। ये मानव इतिहास की सबसे भीषण महामारियों में से एक मानी गई थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना और स्पेनिश फ्लू में तुलना इसलिए की जा रही है क्योंकि दोनों महामारियों ने लोगों को अंदर से हिला दिया है।
बता दें कि स्पेनिश फ्लू का केंद्र स्पेन था। यह 1918 का समय था जब तीन देशों- अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस में इस फ्लू ने दस्तक दे दी थी। स्पेन इस मामले में तटस्थ था, इसलिए इसने अपने प्रेस को सेंसर नहीं किया। फ्लू की 'रिपोर्ट' सबसे पहले स्पेन में दर्ज की गई थी, इसलिए इसे स्पेनिश फ्लू कहा जाता है। ब्राजील के लोगों ने इसे जर्मन फ्लू तो सेनेगल ने इसे ब्राजीलियन फ्लू भी कहते हैं।

ऐसे नाम पड़ा कोरोना
कोरोना का सेंटर चीन का वुहान शहर में है। बावजूद स्पेनिश फ्लू की तर्ज पर इसे चीनी फ्लू नहीं कहा गया। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2015 में किसी बीमारी का नाम देने को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे। यही वजह है कि कोरोना को चीनी फ्लू या वुहान प्लेग नहीं बुलाया गया। इसे कोविड- 19 नाम दिया गया क्योंकि महामारी में किसी एक देश का नाम नहीं घसीटा जाए।

कोरोना और स्पेनिश फ्लू की तुलना 

क्या हमें कोविड-19 की तुलना स्पेनिश फ्लू से करनी चाहिए?' इसका जवाब है कि फ्लू और कोविड- 19 का कारण बनने वाले वायरस दो अलग-अलग परिवारों के हैं। Sars-CoV-2 की वजह से कोविड- 19 आया जो कि कोरोना वायरस से संबंधित है। इसमें और SARS (सिविअर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम जो 2002 में चीन में उत्पन्न हुआ) एवं MERS (मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम जो 2012 में सऊदी अरब में शुरू हुआ) के बीच अधिक समानताएं हैं तो इनकी कुछ समानताओं के कारण हम इन दोनों की तुलना कर सकते हैं। स्पेनिश फ्लू के बाद कोरोना ही एक ऐसी महामारी जिससे पांच हजार लोगों की दर्दनाक मौतें हुई है।

स्पेनिश फ्लू जितना खतरनाक नहीं कोरोना
फ्लू का वायरस आबादी के माध्यम से तेजी से और अपेक्षाकृत समान रूप से फैलता है जबकि कोरोनावायरस गुच्छों में संक्रमित होता है। यही वजह है कि सैद्धांतिक तौर पर कोरोना वायरस के प्रकोपों को रोकना आसान है। सबसे बड़ी बात कि 1918 से अब तक दुनिया में कई विकास किए हैं। उस समय लोग स्वास्थ्य जानकारों की सलाह बहुत कम ही मानते थे। स्पेनिश शहर जमोरा में स्वास्थ्य अधिकारियों से अलग स्थानीय बिशप ने संत रोको के सम्मान में फ्लू के दौरान लगातार नौ दिनों तक शाम की प्रार्थना का आदेश दिया। बता दें कि जमोरा में ही फ्लू से सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई थीं। यहां मरने वालों का आंकड़ा पूरे यूरोप में सबसे अधिक था।