वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच बाइडेन प्रशासन (Biden administration) रूसी कच्चे तेल (Russian crude oil) के आयात के फैसले को वापस लेने के लिए भारतीय नेताओं के संपर्क में है। व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी है। व्हाइट हाउस (white house) की प्रेस सचिव जेन साकी से शुक्रवार को जब रिपोर्टों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि भारत यूक्रेन युद्ध पर प्रतिबंधों के बीच रियायती कीमतों पर रूसी तेल खरीदने की योजना बना रहा है।

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उन्होंने कहा कि कई देश रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए सहमत नहीं हैं। साकी ने कहा, 'ठीक है, हमने नहीं किया है जबकि हमने तेल के रूसी आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। हर देश ने वह निर्णय नहीं लिया है और हम इसे मानते हैं।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूरोप सहित कई देशों के पास रूसी तेल और गैस आयात करने के आर्थिक कारण हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका विभिन्न स्तरों पर भारतीय नेताओं के संपर्क में है।

साकी ने कहा, 'निश्चित रूप से हम राष्ट्रपति के माध्यम से नहीं, बल्कि कई स्तरों पर भारतीय नेताओं के संपर्क में हैं। अगर ऐसा होता है, तो हम निश्चित रूप से आप सभी को जानकारी प्रदान करेंगे।' उन्होंने कहा, 'लेकिन हम दुनिया भर के किसी भी नेता को जो प्रोजेक्ट या संदेश देंगे वह यह है कि बाकी दुनिया देख रही है कि आप कहां खड़े होने जा रहे हैं क्योंकि यह इस संघर्ष से संबंधित है, चाहे रूस के लिए उसका समर्थन किसी भी रूप में हो जो अवैध रूप से यूक्रेन पर हमला कर रहे हैं।' लेकिन हम दुनिया भर के किसी भी नेता को जो संदेश देंगे, वह यह है कि दुनिया - बाकी दुनिया यह देख रही है कि आप कहां खड़े हैं क्योंकि यह दो देशों के बीच युद्ध से संबंधित है।' यह टिप्पणी तब सामने आयी है जब भारत ने इशारा किया है कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद कई देश रूस से ऊर्जा आयात करना जारी रखे हुए हैं, वो भी खासकर यूरोप में। 

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सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत के वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। हमें कच्चे तेल की जरुरत का लगभग 85 प्रतिशत (प्रति दिन 50 लाख बैरल) आयात करना पड़ता है। जिसमें अधिकांश आयात पश्चिम एशिया (इराक 23 प्रतिशत, सऊदी अरब 18 फीसदी, संयुक्त अरब अमीरात 11 प्रतिशत) से होता हैं। अमेरिका भी 7.3 फीसदी के साथ अब भारत के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। चालू वर्ष में अमेरिका से आयात में काफी वृद्धि होने की संभावना है, संभवत: यह लगभग 11 प्रतिशत हो सकता है।