BharatNet Project के तहत सरकार ने 2.52 लाख ग्राम पंचायतों को फास्ट स्पीड की ब्रॉडबैंड सर्विस (Fast speed broadband service) से जोड़ने का लक्ष्य रखा. PM मोदी ने प्रोजेक्ट का विस्तार सभी गांवों तक करने की घोषणा की.

भारतनेट प्रोजेक्ट को दुनियाभर में सबसे बड़ा (BharatNet project can be considered as the largest broadband program in the world) ब्रॉडबैंड प्रोग्राम माना जा सकता है जो ग्रामीणों को कनेक्ट करेगा. ये मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत शुरू हुआ प्रोग्राम है और जिसमें विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी नहीं रहेगी. भारतनेट प्रोजेक्ट के जरिए सरकार की ‘Digital India’ पहल को  बढ़ावा मिलेगा क्योंकि इसके तहत गांव-गांव तक इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.

क्या है इसके फायदे 

इस प्रोजेक्ट के तहत, 16 राज्यों (नौ पैकेजों में बंडल) में पीपीपी मॉडल में भारतनेट का कार्यान्वयन फंडिंग के आधार पर किया जाना है. 2017 में पहले से स्वीकृत 42,068 करोड़ रुपये की राशि सहित कुल परिव्यय (आउटले) अब 61,109 करोड़ रुपये होगा. भारतनेट के विस्तार से ऐड अपग्रेडिंग में ग्राम पंचायतें और बसे हुए गांव शामिल होंगे.

पूर्व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद (Former IT Minister Ravi Shankar Prasad) ने इस विषय पर सोशल मीडिया ऐप  कू पर अपने विचार रखे और इस प्रोजेक्ट में बारे में लोगो को बताय। अपनी पोस्ट में वे लिखते है- भारतनेट विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी परियोजना है।

भारतनेट का लक्ष्य सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ना है।  अब तक 1.78 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें आप्टिकल फाइबर से जोड़ी जा चुकी हैं और 5.49 लाख किमी से अधिक OFC बिछाई जा चुकी है।  

यह परियोजना तीन चरणों में की जानी है जिसमेँ अब एग अपने तीसरे चरण में पहुँच चुकी हैं 

पहला  चरण:

दिसंबर 2017 तक भूमिगत ऑप्टिक फाइबर केबल (Optic Fibre Cable- OFC) लाइन बिछाकर एक लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।

दूसरा चरण:

मार्च 2019 तक भूमिगत फाइबर, बिजली लाइनों पर फाइबर, रेडियो और सैटेलाइट मीडिया के इष्टतम उपयोग से देश की सभी ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी प्रदान करना।

तीसरा  चरण:

वर्ष 2019 से 2023 तक एक अत्याधुनिक, फ्यूचर-प्रूफ नेटवर्क (Future-Proof Network) के तहत ज़िलों और ब्लॉकों के मध्य फाइबर को विस्तारित करने हेतु रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) का उपयोग किया जाएगा।

बता दे की इस परियोजना को अक्तूबर 2011 में नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (National Optical Fibre Network- NOFN) के नाम से लांच किया गया था, वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर भारत नेट प्रोजेक्ट (Bharat Net Project) कर दिया गया।