नागरिकता संशोधन बिल -2019 को लेकर हो रहा विरोध प्रदर्शन थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। लोगों का मानना है कि बिल असम की स्वदेशी आबादी के लिए खतरा है। राज्य में भाजपा के कई नेताओं ने भी संशोधन बिल का विरोध किया है। इसके चलते शुक्रवार (18 जनवरी, 2019) को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव असम के उन विधायकों और पार्टी नेताओं से मिले जिन्होंने बिल पर असंतोष व्यक्त किया। माधव ने कहा कि वो भाजपा की सहयोगी असम गढ़ परिषद (AGP) से भी बात करेंगे जो बिल के विरोध में सरकार से बाहर हो गई। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अलग से ताकतवर ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (AASU) से बात की, जिसने बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।’


भाजपा के राज्य महासचिव दिलीप सैकिया ने कहा, ‘राम माधव बिल का विरोध करने वालों के पास गए और बिल के संबंध में उनके भ्रम को दूर किया। उन्होंने बताया कि आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2014 है और इस बिल में असम में अवैध बांग्लादेशियों के नए जत्थों को बड़े पैमाने पर आने की अनुमति नहीं दी गई। राष्ट्रीय महासचिव ने नेताओं से पार्टी के रुख का समर्थन करने की भी अपील की।’ सैकिया के मुताबिक भाजपा आने वाले दिनों में आम जनता के बीच भी पहुंचेगी और बिल के विरोध में फैलाए जा रहे झूठ का जवाब देगी।


दिसपुर के भाजपा विधायक ने भी किया बिल का विरोध
हालांकि दिसपुर से विधायक अतुल बोरा उन पांच भाजपा एमएलए में से एक हैं जिन्होंने संशोधन बिल का साफतौर पर विरोध किया है। बोरा ने कहा कि वह पार्टी के भीतर चर्चाओं के बाद भी ‘बिल्कुल आश्वस्त नहीं हैं।’ विधायक के मुताबिक, ‘बिल 1985 असम समझौते का उल्लंघन करता है और यह असंवैधानिक है। मैं यहां की आबादी और यहां की जमीन के बारे में जानता हूं। अगर बिल पास हुआ तो 1971 से पहले यहां बसे सभी मूल भारतीयों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।’ दिसपुर विधायक के मुताबिक, ‘बिल के विरोध ने लोगों की भावनाओं को दिखाया। मैं पार्टी नहीं लोगों के साथ खड़ा हूं। मैंने अपनी पार्टी के नेतृत्व को इस बारे में बताया है।’


भाजपा विधायक को उम्मीद सभी की राय सुनेगी भाजपा
सुतिया से भाजपा विधायक पदमा हजारिका को उम्मीद है कि भाजपा सभी की राय सुनेगी। उन्होंने पूर्व में एक रैली को संबोधित करते हुए साफ किया कि असम समझौते को जस का तस लागू किया जाना चाहिए। कोई भी शख्स जो 24 मार्च, 1971 के बाद असम की सीमा में दाखिल हुआ उसे विदेशी माना जाना चाहिए। उसका धर्म चाहे जो भी हो। उन्होंने कहा कि उनके भाषण ने बिल पर उनकी स्थिति को दर्शाया। इसलिए वह इस मुद्दे पर और अधिक नहीं बोलना चाहते।