पिछले 10 महीनों से राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके में किसानों के विरोध का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें यकीन है कि सोमवार का भारत बंद केंद्र सरकार को किसानों की आवाज सुनने के लिए मजबूर करेगा। टिकैत ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि इस बार (भारत बंद) सरकार हमारी मांगों को मानेगी।'

यह कहते हुए कि यह आंदोलन किसी एक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है उन्होंने इस बात से इनकार किया कि केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान विरोध में भाग ले रहे हैं, उन्होंने कहा, 'पूरे भारत के किसान हमारे साथ हैं।' टिकैत ने आगे कहा, 'हमें इस विरोध को कितनी भी देर तक खींचना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे।'

लगभग एक साल पहले केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान विरोध कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड, उमस भरी गर्मी, भारी बारिश को झेलते हुए दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमाओं के बाहर डेरा डाले हुए किसान जरूरत पडऩे पर और रुकने को तैयार हैं। टिकैत ने कहा, 'रुक जाएंगे 10 महीने और (यानी वह 10 महीने और रुकने के लिए तैयार हैं)।'

संसद द्वारा तीन कृषि कानून पारित किए जाने के बाद से यह तीसरा भारत बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत बंद की सफलता मीडिया पर भी निर्भर करती है। टिकैत ने कहा, 'अगर वे इसे ठीक से कवर करेंगे और जमीन पर जो कुछ भी हो रहा है उसे दिखाएंगे तो यह भारत बंद सफल होगा, अन्यथा नहीं।' किसान संघ के नेता ने कहा, 'जहां तक सरकार का सवाल है, वे वही कहेंगे जो उनके कथन के अनुकूल होगा और उन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा।'

उन्होंने आगे कहा कि हमने नहीं सोचा था कि यह भारत बंद लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करेगा, 'लोग बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों से परेशान हैं। यह उन्हें सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। यह एक दिन का सौदा कुछ भी नहीं है। जनता अपने दैनिक जीवन में किन समस्याओं का सामना कर रही है।'

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने किसानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए गाजीपुर सीमा पर धरना स्थल का दौरा किया। इस दौरान उनकी और राकेश टिकैत के बीच एक छोटी सी बातचीत हुई।