कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम) द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन ने सिफारिश की है कि कौटिल्य के अर्थशास्त्र और भगवद गीता जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों से प्रासंगिक शिक्षाओं को सैन्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया है कि इस मामले पर शोध करने के लिए एक भारतीय संस्कृति अध्ययन मंच और एक संकाय की व्यवस्था की जानी चाहिए। सिकंदराबाद में स्थित सीडीएम, एक प्रमुख त्रि-सेवा सैन्य प्रशिक्षण संस्थान है। उच्च रक्षा प्रबंधन के लिए इस संस्थान में सेना, नौसेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने प्रोजेक्ट को प्रायोजित किया है जिसका शीर्षक है "एट्रिब्यूट्स इफ एंशिएंट इंडियन कल्चर एंड वारफेयर टेक्निक्स एंड इट्स इनकॉर्पोरेशन इन द प्रेजेंट डे स्ट्रेटेजिक थिंकिंग एंड ट्रेनिंग"। इस परियोजना की परिकल्पना भारतीय सशस्त्र बलों में रणनीतिक सोच और नेतृत्व के संदर्भ में विशिष्ट प्राचीन ग्रंथों की खोज पर की गई थी और एक रास्ता तैयार किया गया था ताकि उन सर्वोत्तम प्रथाओं और विचारों को अपनाया जा सके, जिनकी वर्तमान समय में प्रासंगिकता है।

सरकार ने पिछले कुछ महीनों में भारतीय सेना के "भारतीयकरण" के लिए एक तीव्र दृष्टिकोण के साथ जोर दिया है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल मार्च में गुजरात के केवड़िया में आयोजित एक सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में अधिक स्वदेशीकरण की मांग की थी। उस तीन दिवसीय सम्मेलन में सशस्त्र बलों में परंपराओं और संस्कृति के भारतीयकरण पर दो सत्र हुए।

आर्मी वॉर कॉलेज, महू ने वर्ष 2016 में एक पेपर प्रकाशित किया था जिसमें महाकाव्य महाभारत और अर्थशास्त्र के उदाहरणों का उल्लेख था और दावा किया था कि उन प्राचीन ग्रंथों में पाए गए रणनीतिक विचार आज के संदर्भ में भी प्रासंगिक हैं।