नीम को गुणों की खान माना जाता है। इसका पेड़ गर्मियों में ठंडक पहुंचाता है। नीम में एंटी बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं और इसी वजह से यह कई हेल्थ प्रॉब्लम्स के लिए अचूक दवा मानी जाती है। मानसून के मौसम में होने वाले फंगल इन्फेक्शन को रोकने में इससे काफी लाभ होता है। नीम सेहत के लिए रामबाण माना जाता है और इसका तेल भी हेल्थ के लिए बहुत उपयोगी है।

अस्थमा और फेफड़े के इंफेक्शन में कारगर

अस्थमा की प्रॉब्लम है तो नीम के तेल की भाप से काफी आराम मिल सकता है। इस तेल में जो तत्व होते हैं, वो नेचर में एंटी-हिस्टेमिनिक हैं। साथ ही प्रभावकारी एंटीमाइक्रोबियल गुणों के कारण यह ज्यादा बेहतर काम करता है। भाप लेने के लिए एक भगोने में पानी गरम करें, इसमें नीम तेल की कुछ बूंदे डाल लें। इसके बाद अपने सिर और चेहरे को एक तौलिया से ढककर भाप लें। इससे अस्थमा के मरीजों को काफी राहत महसूस होगी।

एग्जिमा में असरदार

एक्जिमा शरीर के इम्यून सिस्टम से उपजी त्वचा की बीमारी है। इससे ड्राइनेस की समस्या होती है और त्वचा पर काफी खुजली मचती है। एक्जिमा वाले स्पॉट्स पर नीम का तेल इस्तेमाल करने से काफी राहत महसूस होती है क्योंकि तेल से ड्राइनेस कम हो जाती है और इन्फेक्शन शरीर के दूसरे हिस्से में होने का खतरा भी कम होता है।

सोरायसिस से मिलती है निजात

सोरायसिस भी आपके शरीर में ऑटोइम्यून गड़बड़ी के कारण होता है, जिससे स्किन की ड्राइनेस बढ़ जाती है। और नीम का तेल इस तरह से प्रभावी होता है क्योंकि यह एक्जिमा का इलाज करता है।

एंटी-फंगल खूबियों से भरपूर

एथलीट फूट, नाखून कवक जैसी स्किन डिजीज फंगल इन्फेक्शन के कारण होती है। नीम में पाए जाने वाले दो तत्व ‘गेदुनिन’ और ‘निबिडोल’ त्वचा के फंगल इन्फेक्शन को खत्म करते हैं।

दांत और मसूड़े होते हैं मजबूत

दांतों और मसूड़ों की प्रॉब्लम में नीम का तेल असरदार है। अपने टूथपेस्ट में नीम के तेल की दो बूंद मिला कर उससे पेस्ट करें। नीम के तेल के एंटी बेक्टीरियल तत्व दांतों की प्रॉब्लम्स जैसे कि दांतों के दर्द, दांत के कैंसर, दांतों में सडऩ आदि में काफी राहत देते हैं।