आयुर्वेद के लिए तांबा एक अत्यंत महत्वपूर्ण धातु है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हजारों सालों तक भारत और अन्य एशियाई देश तांबे के बड़े बर्तनों में पानी जमा करते थे। लोग गर्मी की तेज धूप में ठंडक महसूस करने के लिए तांबे के छोटे बर्तनों का पानी पीते थे। इस धातु में और भी बहुत कुछ था और तांबे के बर्तन से पानी पीने के कई फायदे हैं। सबसे अच्छे लाभों में से एक तांबे के बर्तन की रोगाणुओं, विशेष रूप से बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता है। वास्तव में, तांबा ई.कोली और एस.ऑरियस (दो प्रकार के बैक्टीरिया जो दस्त और पेचिश का कारण बन सकते हैं) से निपटने के लिए उत्कृष्ट है। स्वच्छ पेयजल के दुर्लभ स्रोतों वाले ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे शुद्ध करने के लिए तांबे के बर्तनों में पानी जमा करते हैं। इन बर्तनों में 16 घंटे तक रखा हुआ पानी पीने से डायरिया के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।

कॉपर एक धातु है जो माइलिन के निर्माण में मदद कर सकती है। यह एक शीट है जो तंत्रिका कोशिकाओं की सुरक्षा करती है और आपके सभी कॉग्निटिव फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण है। एक अध्ययन से पता चला है कि जिन लोगों को दर्दनाक मस्तिष्क की चोट लगी है, यदि उनका कॉपर लेवल कम है तो इसे ठीक करना बेहद कठिन होगा।

आयुर्वेद के अनुसार, हर किसी के पास एक प्रमुख चयापचय ऊर्जा होती है। इन्हें वात, पित्त और कफ के नाम से जाना जाता है। यदि इन ऊर्जाओं में कोई असंतुलन है, तो आपको चिकित्सा संबंधी समस्याओं और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आयुर्वेद मानता है कि तांबे के बर्तन का पानी पीने से इन सभी तरह की एनर्जी को बैलेंस करने में मदद मिलती है।

कॉपर शरीर के लिए बेहद जरूरी है। यह लोहे और अन्य महत्वपूर्ण मस्तिष्क कार्यों को तोडऩे में मदद करने के लिए शरीर में कम मात्रा में पाया जाता है। हालांकि, तांबे की कमी के कारण दुर्लभ हाइपोक्यूप्रेमिया होना संभव हो सकता है। इसलिए अगर सुबह सबसे पहले तांबे के बर्तन का पानी पीने की आदत डालते हैं तो आपमें इसकी कमी से होने वाले बीमारी नहीं होगी।

तांबे के बर्तन से पानी पीने का सही तरीका

- ऐसा गिलास चुनें जो पूरी तरह से तांबे से बना हो और अन्य धातु के निशान के साथ मिश्रित न हो, अन्यथा, आपको तांबे के उपयोग का पूरा लाभ नहीं मिलेगा।

- तांबे के बर्तन का इस्तेमाल करने से पहले उसे नींबू और पानी से धो लें। किसी डिशवॉशिंग साबुन का उपयोग न करें, क्योंकि यह बहुत नुकसानदायक हो सकता है।

- अपने बर्तन में पानी भरकर अपने पलंग के पास रख दें और सुबह सबसे पहले इसे पिएं। ऐसा करने से पानी का स्वाद थोड़ा धात्विक लग सकता है लेकिन आपको समय के साथ इसकी आदत हो जाएगी। इसके अलावा, सुबह सबसे पहले शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए एक गिलास साफ पानी से अच्छा कुछ नहीं है।

आयुर्वेद तांबे के बर्तन से दिन में केवल दो बार पीने की सलाह देता है और इससे ज्यादा नहीं। विशेषज्ञ तांबे के बर्तनों को लगातार तीन महीने तक इस्तेमाल करने के बाद आपके शरीर को एक महीने का अंतराल देने की सलाह देते हैं। जबकि तांबे के बर्तन से पानी पीना बिल्कुल ठीक है लेकिन उनमें खाना न पकाएं। कॉपर टॉक्सिटी एक वास्तविकता है। तांबे के बर्तन में खाना पकाने से हमारे भोजन में और हमारे सिस्टम में तांबे का रिसाव हो सकता है। यदि आपके के शरीर में अत्यधिक मात्रा में तांबा चला गया , तो आपको मतली और दस्त का लग सकते हैं।