टिकाऊ उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले टीवी, फ्रिज जैसे इलेवट्रॉनिक सामानों के दाम बढ़ा सकती है । इसकी वजह डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से कंपनियों का आयात बिल बढ़ना है । कंपनियां इसका आंशिक भार ग्राहकों पर डाल सकती हैं । 

फिलहाल सोनी, पैनासोनिक और गोदरेज जैसी कंपनियों का कहना है कि रुपए की कीमत में होने वाले उतार-चढाव पर उनकी नजर बनी हुई है । गोदरेज अप्लायंसेस के बिजनेस हेड और ईवीपी कमल नंदी ने कहा कि रुपए की कमजोरी से इंपोर्टेड कंपोनेंट-पार्ट्स की कीमतें बढी है । हम इसके असर का मूल्यांकन कर रहे हैं । यदि रुपया इसी स्तर पर बना रहता है या इससे और कमजोर होता है तो हमें निकट भविष्य में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढाने पड़ेगें और हम इस पर महीने के अंत तक फैसला कर सकते हैं । 

पैनासोनिक इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट एवं सीईओ मनीष शर्मा ने भी कृछ ऐसे ही संकेत दिए । उन्होंने कहा कि रुपए की गिरावट का कच्चे माल की लगात पर दबाव पड़ रहा है। इससे विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी  का रुझान है। त्योहारी सीजन शुरू होने के करीब है । यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है तो जल्द ही इलेट्रॉनिक्स गैजेट्स बनाने वाली कंपनियों को  अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढाने होंगे । 

मोबाइल फोन निर्माताओं का भी कहना है कि रुपए की लगातार कमजोरी से उन्हें भी, खासकर एंट्री लेवल के मोबाइल  फोन के दाम बढ़ाने  पड़ पकते है । इंटेक्स टेवनोलॉजीज (इंडिया) की डायरेक्टर निधि मार्केंडय ने कहा कि यदि रुपया और कमजोर हुआ तो हमें मोबाइल के दाम बढाने पड़ेंगे  । कोमियों इंडिया के सीईओ संजय कलिरोना ने कहा कि कच्चे माल की लागत और डयूटी बढ़ाने की  वजह से भारतीय मोबाइल हैंडसेट इंडस्ट्री पहले से दबाव में है । 

हम बहुत कम मार्जिन पर कारोबार कर रहे हैं । रुपए की कमजोरी से मार्जिन पर और दबाब पड़ता है तो हमें दाम बढाने पड़ेगे । एक अमरीकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गुरुवार को 70.40 का रिकॉर्ड निचला स्तर छू गया  । कारोबार की समाप्ति पर यह बुधवार के बंद भाव 69.89 के मुकाबले 26 पैसे नुकसान के साथ 70.15 पर बंद हुआ । यह इसकी अब तक की सबसे कम कीमत है। इस साल एशियाई मुद्राओं में भारतीय रुपए ने सबसे खराब प्रदर्शन किया है। 2017 के अंत में एक डॉलर की कीमत 64.27 थी ।