बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की तरफ से सिलहट में आयोजित एक इफ्तार पार्टी में हिंदुओं को भी बीफ यानि गाय का मांस खाने के लिए दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि कार्यक्रम स्थल पर उपलब्ध कराए गए इफ्तार के मेन्यू में बीफ की जगह कोई दूसरी डिश लेने का कोई विकल्प नहीं था। इस घटना ने सोशल मीडिया में हंगामा मचा दिया है। बांग्लादेश की अखबारों की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को बीएनपी की सिलहट इकाई द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में कम से कम पार्टी के 20 नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस आयोजन में आमतौर पर मुस्लिम और अन्य समुदायों के सदस्य शामिल होते हैं। इफ्तार के लिए परोसे गए प्लेटों में अन्य व्यंजनों के साथ गोमांस भी दिया गया।

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इतना ही नहीं बल्कि हिंदू समुदायों के आमंत्रित पत्रकारों को भी कथित तौर पर गोमांस खाने के लिए कहा गया। घटना के बाद बीएनपी के स्थानीय हिंदुओं ने आयोजकों की निंदा करने के लिए फेसबुक का सहारा लिया। बीएनपी के एक स्थानीय सदस्य मंटू नाथ ने निमंत्रण पर अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए लिखा, "बीफ की जगह किसी दूसरी डिश के विकल्प के अभाव में मुझे और 20 अन्य हिंदू सहयोगियों को सभी मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपना उपवास तोड़ते हुए देखना पड़ा।" बीएनपी के छात्र संगठन के एक स्थानीय नेता कनक कांति दास ने व्यवस्था को एक तमाशा बताते हुए कहा, "आपने अपने इफ्तार का आनंद लिया और हम हिंदू आमंत्रित बस देखते रह गए"। आपको बता दें कि बिना कोई माफी मांगे बीएनपी सिलहट जिले के नेताओं ने बाद में इसे स्वीकार किया।  

स्तंभकार और एकशी पदक से सम्मानित अजय दास गुप्ता ने कहा कि जिन सैन्य शासकों ने 15 साल तक बांग्लादेश पर कब्जा किया और शासन किया उन्होंने पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी को वैध ठहराया। उन्होंने संवैधानिक संशोधन भी पेश किए जिसने देश की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक राजनीति को कमजोर कर दिया और अंत में इस्लाम को बांग्लादेश का राज्य धर्म घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि बीएनपी और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी जैसी कुछ पार्टियों ने "कट्टरपंथी इस्लाम के पाकिस्तानी सैन्य-कट्टरपंथी मॉडल" को बहाल करने की कोशिश की है, लेकिन असफल रहे।

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बीएनपी के 2001-2006 के कार्यकाल के दौरान भी पार्टी के वास्तविक नेता के रूप में तारिक रहमान के उदय के बाद हिंदुओं के खिलाफ एक व्यवस्थित नरसंहार हुआ। इसके कारण बड़े पैमाने पर व्यवस्थित भूमि हथियाना, मंदिरों और व्यवसायों पर हमले और बलात्कार हुआ। विपक्ष में रहते हुए, बीएनपी पर युद्ध अपराध परीक्षणों के दौरान हिंदुओं पर हमले करने में जमात की सहायता करने का आरोप लगाया गया है। 2021 की दुर्गा पूजा हिंसा के दौरान हाल के हमलों के दौरान बीएनपी और जमात तत्वों की भागीदारी पाई गई है।