कोरोना पिछले साल 2019 की सर्दियां आया था। अब तक यह सारी दुनिया में फैल चुका है और लाखों लोगों की जान भी ले चुका है। कई वैज्ञानिकों का मानना था कि साल 2020 की तेज गर्मियों में कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा लेकिन कोरोना खत्म होने के बजाए ज्यादा बड़ गया है। अब तक दुनिया में कोरोना से 4 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। अभी भी इसका सिलसिला जारी है।


हाल ही में वैज्ञानिकों ने कहा कि मौसम पहले से सांस के रोगियों के लिए खतरनाक माना जाता है क्योंकि प्रदूषण सेहत पर असर डालता है। बताया कि इस साल कोरोना खतरा और भी ज्यादा है। क्योंकि कोरोना से फ्लू हुआ तो लक्षण पहचानना मुश्किल हो जाएगा। लोगों में सांस लेने में तकलीफ को लेकर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के डॉ. तन्मय तालुकदार  ने बताया कि कोरोना के मामले में बड़े देशों से तुलना करें तो भारत की स्थिति बेहतर है।


यह समय सांस के मरीजों के लिए सबसे संवेदनशील है। इस दौरान में डॉ. तन्म।य ने कहा कि सर्दियों में हमें वायरस के साथ-साथ प्रदूषण से भी बचना है क्योंकि प्रदूषण के कारण वायरस से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जिससे सांस से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ती हैं। इसलिए सर्दियों में दवाओं का खास ध्या न रखना है। अगर समय पर दवा नहीं ली और लक्षण आए, तो कंफ्यूजन होगा या फिर कोरोना होगा।