उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बरेली में इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल (IMC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बरेली दंगे के आरोपी मौलाना तौकीर रजा ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून का स्वागत किया। हालांकि इस कानून को लेकर उन्होंने अटपटी दलीलें भी दीं।

उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून हिंदुओं के खिलाफ है क्योंकि हिंदुओं के ज्यादा बच्चे होते हैं। उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित रखने के लिए कानून बन रहा है। उन्होंने आगे कहा कि  मुसलमानों के दो से ज्यादा बच्चे नहीं होते हैं और उन्हें वैसे भी सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है।

उन्होंने नई कार्यकारिणी का गठन भी किया इस दौरान उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर निशाना भी साधा। चुनाव में पार्टी को समर्थन देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे उस पार्टी का साथ देंगे जो दंगा आयोग बनाएगा। ओवैसी पर भी मौलाना ने निशाना साधा और कहा कि ओवैसी की भाषा हैदराबाद तक तो ठीक लेकिन पूरे देश के लिए ठीक नहीं है।

कोरोना पर बेतुका बयान
मौलाना तौकीर रजा ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कोरोना का सहारा लेकर सामाजिक दूरी का प्रचार किया गया, असल में सामाजिक दूरी से कोरोना नहीं रुक रहा जो लोग समाज मे समूह में रहते हैं, उन्हें कोरोना नहीं हुआ। सामाजिक दूरी को बनाये रखने की बात उन लोगों ने की जो समाज में बंटवारा चाहते हैं। एक दूसरे से लोगों को दूर रखना चाहते हैं, हमारा मजहब हमें ये सिखाता हैं कि कंधे से कंधा मिलाकर हमे नमाज पढ़नी चाहिए। कोरोना कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है, मैं कोरोना के मरीजों के पास भी गया हूं, उनको छुआ भी है, जो लोग कोरोना से मरे हैं उनके अंतिम संस्कार में भी गया हूं। ऐसी महामारी बेइमानी, जुर्म और जाति, नफरत और ताकत का गलत इस्तेमाल करने वालों की वजह से फैलती है।

मौलाना ने कहा कि आने वाले चुनाव में वो उस पार्टी को ही सपोर्ट करेंगे जो दंगा आयोग बनाने का वायदा करेगी। उन्होंने कहा दंगा आयोग इसलिए जरूरी है क्योंकि कल जब ये लोग हुकूमत में नहीं रहेंगे तो यही लोग दंगा करेंगे। दंगा आयोग इसलिए जरूरी है वरना पुलिस जिसे चाहती है दंगाई बना देती है। इसलिए दंगा आयोग बने और पारदर्शिता से जांच हो और जो असल दंगाई है वो बेनकाब हो सकें। गौरतलब है कि बरेली में 2010 में दंगों का आरोप मौलाना तौकीर रजा पर लगा था और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। तब बरेली में 27 दिनों तक कर्फ्यू लगा था।