खुशखबरी है कि EMI के लिए छूट न लेने वालों के खाते में 5 नवंबर तक कैशबैक आएगा। इस दिवाली पर सरकार देश के कर्जधारकों को 6500 करोड़ का भारी-भरकम गिफ्ट देने जा रही है। अगर आपने किसी तरह के फाइनैंशल इंस्टिट्यूशन से 2 करोड़ तक का लोन लिया है तो आपको भी यह गिफ्ट मिलेगा। आपने जिस बैंक या फाइनैंशल इंस्टिट्यूशन से यह लोन लिया है वह 5 नवंबर तक आपके अकाउंट में यह रकम ट्रांसफर कर देगा।

इंडियन बैंकिंग असोसिएशन के चेयरमैन राजकिरण राय ने कहा कि यह बहुत सीधी स्कीम है। अगर 29 फरवरी तक लोन NPA नहीं है तो सभी कर्जधारकों को स्कीम का फायदा मिलेगा। इसके कैलकुलेशन में कोई समय नहीं लगेगा, क्योंकि सारा काम सॉफ्टवेयर की मदद से होगा। हालांकि इसका लाभ लेने के लिए ऑडिटर्स की मंजूरी जरूरी होगी। ऑडिटर ही पात्रता की जांच करेंगे। माना जा रहा है कि बैंक अपनी वेबसाइट पर इसको लेकर एक कॉलम तैयार करेंगे। यहां पात्र कर्जदार अपनी समस्या रख पाएंगे।
दरअसल केंद्र सरकार ने कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। उसने बैंकों से कर्ज लेने वालों को एक तरह से दिवाली का उपहार तोहफा देते हुए दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज से राहत की घोषणा की है। यह राहत मोराटोरियम पीरियड से संबंधित है जो 1 मार्च से 31 अगस्त तक लागू किया गया था। इस दौरान कर्जदारों को ईएमआई से तात्कालिक राहत दी गई थी। केंद्र सरकार की इस स्कीम का फायदा सभी कर्जदारों को मिलेगा, चाहे उन्होंने किस्त भुगतान से छह महीने की दी गई छूट का लाभ उठाया हो या नहीं। वित्तीय सेवा विभाग ने उच्चतम न्यायालय के द्वारा ब्याज राहत योजना लागू करने का निर्देश दिये जाने के बाद इसके परिचालन के दिशानिर्देश जारी कर दिये। इस योजना के क्रियान्वयन से सरकारी खजाने पर 6,500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह कोविड-19 महामारी के मद्देनजर रिजर्व बैंक की किस्तों के भुगतान से छूट की योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज माफ करने के बारे में जल्द फैसला। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आम लोगों की दिवाली अब सरकार के हाथों में है। मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार , 'जिन कर्जदारों के लोन अकाउंट की मंजूर सीमा या कुल बकाया राशि 29 फरवरी तक दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, वे इस योजना का लाभ उठाने के पात्र होंगे।' दिशानिर्देशों में बताई गई पात्रता शर्तों के अनुसार, 29 फरवरी तक इन खातों का मानक होना अनिवार्य है। मानक खाता उन खाताओं को कहा जाता है, जिन्हें NPA नहीं घोषित किया गया हो।
इस योजना के तहत होम लोन, एजुकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड का बकाया, वीइकल लोन, MSME लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन के धारकों को लाभ मिलेगा। योजना के तहत, फाइनैंशल इंस्टिट्यूशन को कर्जदारों को संबंधित अकाउंट में कम्पाउंट इंट्रेस्ट और सिंपल इंट्रेस्ट के बीच अंतर की राशि जमा करनी होगी। इस स्कीम में कहा गया है कि योजना में कहा गया है कि कर्जधारक ने रिजर्व बैंक के द्वारा 27 मार्च 2020 को घोषित किस्त भुगतान से छूट योजना का पूरा या आंशिक लाभ का विकल्प चुना हो या नहीं, उसे ब्याज राहत का पात्र माना जाएगा। कर्ज राहत योजना का लाभ उन कर्जधारकों को भी मिलेगा जो नियमित किस्तों का भुगतान करते रहे।
इस स्कीम के तहत बैंक पात्र कर्जदारों को कैशबैक देंगे और वह पैसा सरकार बैंकों को देगी। फाइनैंशनल इंस्टिट्यूशन्स पर करीब 100 लाख करोड़ का लोन आउटस्टैंडिंग है। माना जा रहा है कि इसमें से करीब 30-40 लाख करोड़ का लोन इस स्कीम के दायरे में आएगा। 8 पर्सेंट के इंट्रेस्ट रेट के हिसाब से करीब 5000-6500 करोड़ रुपये ब्याज पर ब्याज के रूप में होंगे। यह फायदा बैंक कर्जदारों को देगी और सरकार बैंकों को।