देश में बैंकों में दो दिन की हड़ताल है। 30-31 मई को बैंक कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या यह है कि करोड़ों सरकारी कर्मचारियों के साथ साथ निजी क्षेत्र में काम करने वालों करोड़ों लोगों पर भी बैंकों में इस हड़ताल का असर पड़ने जा रहा है। कारण साफ है कि हड़ताल के दोनों ही दिन महीने के आखिरी दिन है और ऐसे में करोड़ों लोगों की सैलरी ट्रांसफर को लेकर समस्या आने वाली है।

बता दें कि हड़ताल का आह्वान भारतीय बैंक संघ (IBA) की वेतन में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी के विरोध में किया जा रहा है। देशभर में बैंक कर्मियों के दो दिन हड़ताल पर जाने का असर बैंकिंग कामकाज पर पड सकता है। आज के बाद बैंक में अगला कामकाज 1 जून को होगा। हड़ताल से नगदी निकासी में परेशानी हो सकती है, लेकिन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि बैंकों की तरफ से कहा गया है कि एटीएम से कैश निकालने में कोई परेशानी नहीं होगी। हड़ताल पर जाने से पहले एटीएम में पर्याप्त कैश भर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों के वेतन में 2 फीसदी बढ़ोतरी करने की पेशकश की है। इसका बैंक कर्मचारी संघों ने विरोध किया है। इस पर बैंक यूनियंस का कहना है कि इससे पहले वेतन वृद्धि साल 2012 में हुई थी, जिसमें कर्मचारियों के वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वेतन बढ़ाने को लेकर 5 मई 2018 को हुई बैठक में आईबीए ने दो प्रतिशत वृद्धि की पेशकश की थी। इस दौरान यह भी कहा गया कि अधिकारियों की मांग पर बातचीत केवल स्केल 3 तक के अधिकारियों तक सीमित होगी।

यूनाइटेड फोरम और बैंक यूनियंस के संयोजक देवीदास तुलजापुरकर का कहना है कि यह एनपीए के एवज में किये गए प्रावधान के कारण है, जिससे बैंकों को नुकसान हुआ और इसके लिए कोई बैंक कर्मचारी जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन साल में बैंक कर्मचारियों ने जन-धन, नोटबंदी, मुद्रा तथा अटल पेंशन योजना समेत सरकार की प्रमुख योजनाओं को लागू करने के लिये दिन-रात काम किए। तुलजापुरकर ने कहा, 'इन सबसे उन पर काम का काफी बोझ बढ़ा।