साल 1932 में एक व्यक्ति को शराब नहीं पीने पर पटियाला रियासत (princely state of patiala) से निकाल दिया गया था, लेकिन ये सजा ही उस व्यक्ति के लिए वरदान बन गई और उसने पूरा औद्योगिक शहर बसा दिया। जी हां, हम गुजरलाल मोदी (gujarmal modi) की बात कर रहे हैं, जिन्हें पंजाब के प्रसिद्ध पटियाला पैलेस में 1932 में आयोजित पार्टी में शराब पीने से मना करने पर महाराजा ने रियासत से निष्कासन कर दिया था।

रियासत से निकाले जाने के बाद गुजरलाल मोदी अपने लिए नए ठिकाने की तलाश में थे और वे दिल्ली के पास एक गांव बेगमाबाद पहुंच जहां, जहां उन्होंने मोदी समूह की नींव डाली और आगे चलकर इस गांव का नाम ही मोदीनगर (Modi nager) हो गया। गुजरलाल मोदी ने सबसे पहले इस औद्योगिक सफर की शुरूआत एक चीनी मिल से हुई। बाद में टायर, कपड़ा, कॉपी मशीन, सिगरेट, दवा, तेल, स्टील आदि कई कारोबार भी इस समूह से जुड़ते चले गये।

बता दें कि गुजरलाल मोदी (gujarmal modi) के जीवन सफर को लेकर सोनू भसीन ने एक किताब लिखी है, जिसका नाम गुजरलाल मोदी: द रिजॉल्यूट इंडस्ट्रियलिस्ट (Book on gujarmal modi) लिखी है। इस किताब में बताया गया है कि किस तरह एक युवा ने विपरीत परिस्थितियों को एक अवसर के रूप में तब्दील कर दिया और इतिहास की रचना की। गुजराल मोदी ने एक ऐसे औद्योगिक शहर की स्थापना की, जो अपने समय से काफी आगे था, इससे काफी लोगों को रोजगार मिला और भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को नयी गति मिली। गुजरलाल मोदी ने अपने समूह की आमदनी से उस वक्त 10 प्रतिशत राशि को सामाजिक दायित्व के रूप में आवंटित करना शुरू किया, जब कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व जैसे शब्द अस्तित्व में ही नहीं थे। मानव संसाधन के क्षेत्र में उनके द्वारा की गयी पहलें भारतीय कारोबार के इतिहास में मानक हैं।