सलमान खान की सुपरहिट फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ की कहनी की पुनरावृति पश्चिम बंगाल में हुई है। बांग्लादेश के एक किसान मूक-बधिर भारतीय युवक को उसके माता-पिता से मिलाने के लिए सीमा पार कर भारत आया है। फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ में बजरंगी का किरदार निभाने वाले सलमान खान की तरह बांग्लादेशी किसान मूक-बधिर युवक की तस्वीर लेकर सीमावर्ती इलाकों में उसके माता-पिता की तलाश में भटक रहा है। वह दरवाजे-दरवाजे जाकर लोगों को युवक की तस्वीर दिखा रहा है ताकि कोई तो उसके माता-पिता के बारे में बताए।

मानवता का धर्म निभा रहे बांग्लादेश के चुआडांगा जिले के दर्शना दामुर हुदा छह घडि़या ग्राम निवासी अरिफुल इस्लाम के पास समय काफी कम है। कारण, उसे कम दिन के लिए वीजा मिला है। इसलिए सुबह से लेकर देर शाम तक वह लोगों से मिल रहा है। गुरुवार को वह भारत आया है। नदिया जिले के हांसखाली इलाके में भटक रहा है। बजरंगी भाईजान (सलमान खान) और अरिफुल की कहानी में अंतर सिर्फ इतना है कि बजरंगी माता-पिता से बिछड़ी मुस्लिम धर्म की पाकिस्तान की मूक-बधिर बच्ची को उसके माता-पिता से मिलवाने के लिए घुसपैठ कर पाकिस्तान गया था और अरिफुल हिन्दू धर्म के मूक-बधिर युवक को उसके माता-पिता से मिलवाने के लिए वीजा लेकर बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आया है।

14 साल पहले अरिफुल को मिला था मूक-बधिर बच्चा

अरिफुल को 14 साल पहले मूक-बधिर बच्चा मिला था। तब वह काफी छोटा था। आज युवा हो गया है। अरिफुल का गांव भारत-बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है। अरिफुल का कहना है कि वर्ष 2006 में वह एक दिन जब अपने खेत में काम कर रहा था तो उसे सीमा पर लगी बाड़ के उस पार (भारतीय क्षेत्र) में खेत के किनारे अकले एक छोटा बच्चा बैठे दिखाई दिया। शाम ढल रही थी। बच्चे के आसपास कोई नहीं दिख रहा था। बच्चे की हालत देख उसे दया आ गई। वह बाड़ तोडक़र बच्चे के पास पहुंचा तो देखा वह रो रहा है। उसने उसके माता-पिता के बारे में पूछा लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे पाया। फिर उसे पता चला कि वह मूक-बधिर है। वह बच्चे को अकेला छोड़ नहीं पाया। अपने घर लिए चला गया।

मंसूर रखा है नाम

अरिफुल ने उसका नाम मंसूर रखा है। उसका पालन पोषण बेटे की तरह किया है। वह उनके परिवार से हिलमिल गया है। परिवार को कोई भी सदस्य उसे गैर नहीं मानता। वह भी सबको अपना मानता है। वह जब उससे बिछड़ेगा तो उसे काफी तकलीफ होगी, लेकिन इस बात की ज्यादा खुशी होगी कि मंसूर को उसके असली माता-पिता से मिल जाएंगे। अरिफुल को अभी तक उसे उक्त युवक के माता-पिता के बारे कोई जानकारी नहीं मिला है। वह मानता है कि काम मुश्किल है। हालांकि उसके हौसले बुलंद है। बांग्लादेशी किसान का कहना है कि वह नेक काम पर निकला है। ईश्रर उसकी मदद करेंगे।

अब हम twitter पर भी उपलब्ध हैं। ताजा एवं बेहतरीन खबरों के लिए Follow करें हमारा पेज :  https://twitter.com/dailynews360