नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment) के खिलाफ असम और त्रिपुरा में हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया। विदेश मंत्रालय द्वारा पहले जारी सूचना के अनुसार मोमेन को गुरुवार शाम भारत पहुंचना था। बांग्लादेशी विदेशी मंत्री के भारत दौरे  को रद्द करने को लेकर विदेश मंत्रालय का बयान आया है।

 

भारत का कहना है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री द्वारा भारत यात्रा रद्द कर दिए जाने से दोनों देशों के रिश्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और वह मज़बूत बने रहेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस मुद्दे पर प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते मज़बूत हैं। और दोनों देशों के नेता कह चुके हैं-यह हमारे रिश्तों का सुनहरा दौर है।

 

उधर, नागरिकता संशोधन बिल को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्री की टिप्पणी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा। ,"कोई कन्फ्यूज़न हुआ है... हमने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा सरकार के राज में धार्मिक अत्याचार नहीं हो रहा है... बांग्लादेश से आए जिन शरणार्थियों ने भारत में शरण मांगी है। उन्होंने धार्मिक आधार पर प्रताड़ना सैन्य शासन के दौरान और बांग्लादेश की पिछली सरकारों के शासन के दौरान झेली थी... हम जानते हैं, और स्वीकार करते हैं कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने अल्पसंख्यकों की समस्याओं को हल करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

 


भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने नागरिकता संशोधन बिल पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की टिप्पणी को लेकर कहा। मुझे नहीं लगता हमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की प्रत्येक टिप्पणी पर जवाब देने की ज़रूरत है। उनके सभी बयान अवांछित हैं। उन्हें भारत के अंदरूनी मामलात पर टिप्पणी करने की जगह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत पर ध्यान देना चाहिए।।




उधर, सूत्रों ने बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद के हालात को देखते हुए उन्होंने अपनी यात्रा रद्द की है। नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार को राज्यसभा में पारित हो गया। इससे पहले यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पारित हो चुका है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी- हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन,पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके विरोध स्वरूप असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन जारी है।