केंद्र सरकार ने असम के उग्रवादी संगठन एनडीएफबी पर लगे प्रतिबंध को अगले पांच वर्षो के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय का मानना है कि एनडीएफबी लगातार हिंसक गतिविधियों के साथ-साथ वसूली जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहा है। यही नहीं, वह भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश की संप्रभुता के लिए खतरा भी पैदा कर रहा है। बता दें कि पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को बढ़ाने संबंधी एक अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने कहा कि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) अलग बोडोलैंड बनाने की अपनी मंशा से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने के लिए अवैध और हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहा है।


अधिसूचना के अनुसार, 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धारा 3 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसार केंद्र सरकार एनडीएफबी को उसके सभी समूहों, गुटों और अग्रिम संगठनों के साथ गैरकानूनी संगठन घोषित करती है।' गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और यह पांच साल तक जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन द्वारा की गई घटनाओं की संख्या का भी उल्लेख किया है। आंकड़ोके मुताबिक जनवरी 2015 के बाद से अबतक लगभग उनहत्तर हिंसक घटनाए हुई हैं, जिसमें 19 लोगों की हत्या हुई है। इस दौरान लगभग 55 चरमपंथी मारे गए हैं, 450 चरमपंथियों को गिरफ्तार किया गया है और 444 हथियार उनसे बरामद किया गया है।


गृह मंत्रालय के मुताबिक एनडीएफबी ने नरसंहार और जातीय हिंसा पैदा की जिसके परिणामस्वरूप हत्याएं हुईं, गैर-बोडो की संपत्ति को नष्ट किया गया, असम में बोडो बहुल क्षेत्रों में निवास करने वाले गैर-बोडो के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा किया गया, देश की सीमा पर शिविर और ठिकाने स्थापित किया गया ताकि अलगाववादी गतिविधियों को हवा दि जा सके।

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