सिक्किम स्थित गुरु नानक देव से संबंधित ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरूडांगमार और चूंगथांग के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए हरसभंव प्रयास किए जाएंगे। यह कहना है शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान प्रो. किरपाल सिंह बडूंगर का। 

बडूंगर ने कहा कि इन गुरूद्वारों के ऐतिहासिक महत्त्व को उजागर करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें डा. किरपाल सिंह चंडीगढ़, डा. बलवंत सिंह ढिल्लों अमृतसर, डा. परमवीर सिंह पटियाला और डा. दलविन्दर सिंह लुधियाना को शामिल किया गया है। समिति को डा. चमकौर सिंह कोआरडीनेट करेंगे। 

शिरोमणि समिति प्रधान ने कहा कि इस सम्बन्धित शिरोमणि समिति के चंडीगढ़ स्थित उपकार्यालय द्वारा कानूनी माहिरों की राय अनुसार कार्यवाही भी की जायेगी। उन्होंने कहा कि पहले पातशाह से सम्बन्धित इन गुरुधामों के साथ सिख संगतों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं परन्तु स्थानीय लोगों द्वारा इन गुरुद्वारों के अस्तित्व को खत्म करने की साजिशें की जा रही हैं।

गुरुद्वारा साहिबान की स्थिति का जायजा लेने के लिए शिरोमणि समिति सदस्य रजिन्दर सिंह मेहता, भगवंत सिंह स्यालका, कर्नल दलविन्दर सिंह और अतिरिक्त सचिव बलविन्दर सिंह जौड़ासिंघा को भी पिछले दिनों भेजा गया था, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट दे दी है।