केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन से कड़े शब्दों में पत्र मिलने के बाद, पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव ने कोविड उपचार के संबंध में एलोपैथी के खिलाफ अपना “आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बयान” वापस ले लिया है। अपने पत्र में, डॉ वर्धन ने बाबा रामदेव से कोविड के इलाज के बारे में एलोपैथी के खिलाफ अपने बयान को "पूरी तरह से वापस लेने" के लिए कहा था। हर्षवर्धन ने कहा कि यह बयान "डॉक्टरों का मनोबल तोड़ सकता है और महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर कर सकता है"।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री वर्धन ने पत्र अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया, जिसमें बाबा रामदेव को टैग किया। बाबा रामदेव ने वर्धन के पत्र का जवाब दिया और अपने स्वयं के एक पत्र के साथ ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि वह एलोपैथी पर अपना बयान "वापस लेते हैं"। बाबा रामदेव ने एलोपैथी पर 'आपत्तिजनक' बयान वापस लेने के बाद कहा कि "आयुर्वेद और योग का उपयोग करके, हमने महामारी के दौरान कई लोगों की जान भी बचाई है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए,"।

जानकारी के लिए बता दें कि IMA ने फरवरी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन पर पतंजलि उत्पाद कोरोनिल के लॉन्च के दौरान बाबा रामदेव के साथ मंच साझा करने पर आपत्ति जताई थी। 19 फरवरी को, पतंजलि आयुर्वेद ने कहा कि टैबलेट को आयुष मंत्रालय से WHO की प्रमाणन योजना के अनुसार कोविड रोगियों के उपचार में सहायक दवा के रूप में प्रमाणन प्राप्त हुआ था। हर्षवर्धन ने ट्वीट किया कि "कोरोना के लिए एलोपैथी उपचार को तमाशा बेकार और लंगड़ा बतख कहना दुर्भाग्यपूर्ण है।"