हमारे देश में बहुत सारे देवी-देवताओं के मंदिर हैं, लेकिन यहां एक भारतीय सैनिक का मंदिर भी है। जहां पर दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं। इतना ही नहीं इस सैनिक ने मरने के बाद भी अपनी नौकरी जारी रखी। ये सब सुनने में अजीब लग रहा है लेकिन सिक्किम में बाबा हरभजन सिंह का मंदिर स्थित है, जहां लोग उनके दर्शनों के लिए आते हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि हरभजन सिंह की 1968 में ही मौत हो चुकी है और किवदंतियों के मुताबिक यहां उनकी आत्मा का वास है जो हर पल सीमा की सुरक्षा में तैनात रहती है।

हरभजन सिंह की मौत तेज उफान वाली एक नदी में डूबने से हुई थी। नदी में पानी इतना गहरा था कि तीन दिन तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद ही उनकी लाश मिल सकी थी, लेकिन इसके बाद जो हुआ उस पर किसी को सहसा विश्वास नहीं होता। किवदंतियों के मुताबिक मौत के कुछ दिन बाद हरभजन सिंह अपने एक साथी सिपाही के सपने में आए और उसे अपना एक मंदिर बनवाने का आदेश दिया। रेजिमेंट ने वहां उनका एक मंदिर बनवा दिया जो आज बाबा हरभजन सिंह के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

तब से लेकर आज तक हरभजन सिंह को एक नियमित सैनिक की भांति लगातार पदोन्नति मिलती रही है। वे अब सेना में बतौर मानद कैप्टन के तौर पर तैनात हैं। हर महीने उनकी तनख्वाह उनके घर भेजी जाती है। कहा जाता है कि बाबा हरभजन सिंह की आत्मा हर समय चौदह हजार फीट की उंचाई पर स्थित इस चौकी की रक्षा करती है। तीन हजार सिपाहियों की आस्था का केंद्र बाबा की आत्मा उनको चीन की तरफ से होने वाले किसी भी प्रकार के हमले की सूचना तीन दिन पहले ही दे देती है।

बाबा हरभजन सिंह के मंदिर की दीवारों पर इस बहादुर सिपाही की आदमकद तस्वीरें मौजूद हैं। बिना जूतों के वर्दी में तैनात सेना का एक जवान मंदिर की चौबीसों घंटे सुरक्षा करता है। यह जवान बाबा की सभी चीजों की नियमित तौर पर देखभाल करता है। इनमें उनकी वर्दी को धोकर प्रेस करना, जूतों पर पॉलिश करना, बिस्तर को ठीक करना और उनकी तस्वीर को उनके कमरे और ऑफिस के बीच लेकर जाना जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल होते हैं। बताया जाता है कि बाबा हरभजन अपने गांव अकेले नहीं जाते बल्कि सेना के तीन जवान गांव तक उनका साथ देने के लिए होते हैं जो उनका सामान लेकर चलते हैं। बाबा हरभजन सिंह अब एक अमर सैनिक हैं और उनका मंदिर अब केवल सैनिकों के लिए ही नहीं अपितु यहां की आम जनता के लिए भी आस्था का केंद्र बन चुका है। किवदंतियों के मुताबिक भारतीय सेना ही नहीं चीनी सैनिकों का भी यही कहना है कि उन्होंने भी बाबा हरभजन सिंह को घोड़े पर गश्त लगाते हुए देखा है।