सीरिया में एक बार फिर अस्पताल को निशाना बनाया गया है। यहां के उत्तरी शहर में एक अस्पताल में मिसाइल हमले हुए हैं, जिसमें दो चिकित्साकर्मी सहित कुल 13 लोग मारे गए हैं। इस शहर पर तुर्की समर्थित लड़ाकों का कब्जा है। अधिकार कार्यकर्ता और सहायता समूह ने यह जानकारी दी है। 

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमले के पीछे किसका हाथ है, पर ये हमले उन स्थानों से किए गए जहां सरकारी सैनिक और कुर्द लड़ाके तैनात हैं। तुर्की के हताय प्रांत के गवर्नर ने कहा कि हमले में 13 असैन्य नागरिक मारे गए और 27 लोग घायल हो गए। गवर्नर के कार्यालय ने हमले के लिए च्सीरियन कुर्दिशज् समूह को जिम्मेदार ठहराया है। ब्रिटेन के मानवाधिकार संगठन सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्सज ने हमले में मारे गए लोगों की संख्या 18 बताई है। विपक्ष के कब्जे वाले स्थानों पर स्वास्थ्य केन्द्रों की सहायता करने वाले सीरियन अमेरिकन मेडिकल सोसाइटी (एसएएमएस) ने बताया कि आफरीन शहर के अल-शिफा अस्पताल पर दो मिसाइलें दागी गईं हैं।

एसएएमएस ने कहा कि मिसाइल दागे जाने से पॉलीक्लिनिक विभाग, आपात चिकित्सा और डिलिवरी कक्ष पूरी तरह से तबाह हो गए। समूह ने अस्पताल पर हमले की घटना की जांच की मांग की है। तुर्की के हताय प्रांत ने हमले के लिए कुर्द समूह को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं कुर्द नीत च्सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेजज् के प्रमुख मजलूम अबादी ने हमले में अपने बलों का हाथ होने से इनकार किया है। उसने एक ट्वीट में कहा कि अमेरिका समर्थित एसडीएफ ऐसे हमले की निंदा करता है जो बेगुनाहों को निशाना बनाते हैं। उसने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

सीरिया एक युद्धग्रस्त देश है, जहां अभी तक पांच लाख लोगों की मौत हो गई है। जबकि बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान बचाकर दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी है। यहां बीते 21 साल से बशर अल असद राष्ट्रपति पद पर काबिज हैं। इस साल हुए चुनाव में भी उन्होंने ही जीत दर्ज की है। हालांकि इन चुनावों को एकतरफा माना जाता है । उन्हें अपने पिता हाफिज अल-असद से ये सत्ता विरासत में मिली थी। 2011 में अरब स्प्रिंग के बाद से ये देश तबाह हो गया है। असद अभी तक 2015 के यूएन के प्रस्ताव को लागू नहीं कर सके हैं।