विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को Janssen (जॉनसन एंड जॉनसन) और AstraZeneca जैसी एडिनोवायरस वेक्टर कोविड वैक्सीन पर चिंता जाहिर की है। वैक्सीन सेफ्टी पर बनी ग्लोबल एडवाइजरी कमिटी ने अपने बयान में 'गुलियन बैरे सिंड्रोम' का जिक्र किया है जो कि एक ऑटोइम्यून डिसॉर्डर है। इसमें इम्यून अपने शरीर के नर्व्स सिस्टम को डैमेज करने लगता है। 

WHO की ग्लोबल एडवाइजरी कमिटी की ओर से दी गई चेतावनी में कहा गया कि Janssen और AstraZeneca वैक्सीन के शॉट से इम्यून सिस्टम डिसॉर्डर की समस्या हो सकती है। यह बीमारी कमजोर मांसपेशियां, दर्द, सुन्नपन और पैरालाइज की दिक्कत को ट्रिगर कर सकती है। GACVS ने 13 जुलाई को Janssen और AstraZeneca वैक्सीन से होने वाले ऐसे गंभीर लक्षणों की रिपोर्ट पर एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस की थी। बता दें कि ये दोनों ही वैक्सीन एडिनोवायरस प्लेटफॉर्म को अपनी रीढ़ की तरह इस्तेमाल करती हैं। 

Oxford-AstraZeneca वैक्सीन को भारत में कोविशील्ड के नाम से मैनुफैक्चर किया गया है। एक्सपर्ट ने बताया कि GBS इंफेक्शन सहित कई कारणों से उत्पन्न हो सकता है। ये दिक्कत पुरुषों और 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जा सकती है। ग्लोबल एजेंसी ने कहा कि वैक्सीनेशन के बाद इसके मामले गुप्त रूप से बढ़ सकते हैं। साल 2011 के एक रिव्यू और मेटा एनालिसिस के मुताबिक, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में एक लाख में से 0.8-1.9 मामलों में GB सिंड्रोम का अनुमान लगाया गया है। 

WHO के मुताबिक, यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी की फार्माकोविजिलेंस रिस्क एसेस्मेंट कमिटी (PRAC) ने 9 जुलाई को  Vaxzevria (यूरोप में मैनुफैक्चर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन) को लेकर एक बयान जारी किया था। इसमें वैक्सीनेशन के बाद GBS को लेकर सतर्क रहने की सिफारिश की गई थी. हालांकि, वे वैक्सीन के साथ GBS की ना तो पुष्टि कर सके और ना इससे इनकार कर सके. रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन में 27 जून 2021 तक वैक्सीनेशन के बाद GBS के कुल 227 मामले दर्ज किए गए थे। यहां 20 जून 2021 तक Vaxzevria से करीब पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है।