राविया के बाहरी इलाके में असम महिला विश्वविद्यालय की 100 से अधिक छात्रआें ने विश्वविद्यालय को तकनीकी संस्थान में बदलने के विरोध में सोमवार दोपहर से 36 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की। इसके साथ छात्राएं सरकार से ये मांग भी कर रही है कि यूनिवर्सिटी के वाइस चसांसलर को स्थार्इ तौर नियुक्त किया जाए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के पूर्ण विकास के लिए बुनियादी ढ़ाचे आैर परर्मानेंट फैकल्टी स्टाॅफ की नियुक्ति की जाए। जोरहाट में डिप्टी कमिश्नर के आॅफिस के सामने छात्राआें ने बैनर आैर पोस्टर्स के साथ सड़क पर बैठ कर ये भूख हड़ताल शुरू की। 


विरोध कर रहे छात्राें का कहना है कि यूनिवर्सिटी में अपने पाठय क्रम को पूरा करने के लिए हमें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ये यूनिवर्सिटी सिर्फ नाम की है, न तो यहां पर कोर्इ बुनियादी ढ़ाचा है आैर न ही संस्थान को चलाने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था। छात्राआें ने धमकी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं पूरा किया तो वे आंदोलन शुरू करेंगे।

 


साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार हमारे भविष्य के साथ राजनीति नहीं कर सकती है। विरोध प्रदर्शन कर रहे एक छात्र का कहना है कि छात्रों के भविष्य के देखते हुए सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि पिछली सरकार की सारी प्रतिबद्धताआें को पूरा करे। इससे पहले 8 मार्च को इंटरनेशनल महिला दिवस के दिन भी छात्राआें ने डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन के प्रतिनिधियों ने जोरहाट जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की थी आैर दइस मुददे को मुख्यमंत्री तक ले जाने को अनुरोध किया था। कथित तौर पर प्रशासन ने छात्राआें को आश्वासन दिया था कि इस मसले पर सीएमआे से संपर्क करेंगे।

बता दें कि अभी तक असम महिला यूनिवर्सिटी असम कृषि यूनिवर्सिटी के समर्थन के तहत चल रहा है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डाॅ बुजार बरुआ हैं। इस यूनिवर्सिटी को पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोर्इ के कार्यकाल के दौरान असम कृषि यूनिवर्सिटी के पुरानी इमारत में स्थापित किया गया था।